अशिक्षित पिता ने बनाया अपनी बिटिया को पुलिस अफसर, बेटी ने अपने काम से जीता सबका दिल

आमतौर पर हम पुलिस वालों के लिए बहुत अच्छी सोच नहीं रखते हैं परंतु हर व्यक्ति एक जैसा नहीं होता है। हर इंसान को उसकी ईमानदारी और उसकी विभिन्न सोच उसे बाकियों से अलग बना देता है। आज हम एक ऐसी महिला पुलिस के बारे में बात करेंगे, जिसने सबको यह बता दिया कि इंसानियत किसे कहते हैं। उस महिला पुलिस का नाम कोट्टुरू सिरीशा (Kottudu Sirsa) हैं। कोट्टुरू विशाखापट्टनम (Visakhapatnam) की रहने वाली हैं। उनके पिता अप्पा राव (Appa Rao) एक राजमिस्त्री हैं। कोट्टुरू के परिवार की आर्थिक इस्थति अच्छी ना होने के बावजूद भी उनके पढ़ाई में कभी कोई रुकावट नहीं आई।

एक महिला पुलिस ने दिखाई इंसानियत

एक महिला एस आई की एक तस्वीर पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर बहुत तेज़ी से वायरल हो रही है। इस तस्वीर में यह देखा जा सकता है कि महिला ने अपने कंधे पर कुछ उठाया है। यह महिला आंध्रप्रदेश के काशीबुग्गा पुलिस स्टेशन की एस आई कोट्टुरू सिरीशा हैं। उन्होंने इस तस्वीर में अपने कंधे पर एक लाश उठाई है‌। उस लाश की कोई पहचान ना होने की वजह से कोट्टुरू ने इस लाश को कंधा दे कर पैदल 2 किमी तक चली। जब यह खबर मीडिया में आई तो हर तरफ उस महिला एस आई की तारीफ होने लगी।

Women SI carries dead body after villagers refuses to help

कोट्टुरू ने लाश देख कर जाना मृत्यु का कारण

यह घटना इसी साल की 30 जनवरी की हैं। कोट्टुरू के पुलिस स्टेशन में अदवी कोठुर गांव से एक फोन आया कि उनके गांव में एक लाश पड़ी हैं। लाश को किसी ने पहचाने से इनकार कर दिया। यह गाँव उनके पुलिस स्टेशन से 10 किमी दूर पड़ता हैं। कोट्टुरू के पास यह फोन सुबह 10.30 बजे आया था, जिसके तुरंत बाद वह उस गाँव के लिए निकल पड़ी। जब कोट्टुरू वहाँ पहुची तो उन्होंने एक 80 वर्षीय व्यक्ति की लास देखी। वह लाश देखते ही यह समझ गई की यह कोई संदिग्ध लाश नहीं बल्कि इसकी मृत्यु भूख के कारण हुई है।

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लावारिस लाश को दिया कंधा

कोट्टुरू मीडिया से बात करते हुए कहती हैं कि उस लाश के शरीर पर किसी भी तरह के कोई चोट के निशान नहीं हैं परंतु उसकी सेहद बहुत कमज़ोर थी। कोट्टुरू ने उस गाँव के स्थानीय लोगों से यह कहा कि वह इस लाश को 2 किमी दूर खड़ी एम्बुलेंस तक छोड़ आने में उनकी मदद करें परंतु कोई भी उनकी मदद के लिए समने नहीं आया। अंत में कोट्टुरू को एक स्थानीय संस्था को फोन करना पड़ा, जो वृद्ध महिलाओं और बच्चों की मदद करती है। इस संस्था में उनके एक जानकार हैं, जिन्हें वह पिता की तरह मानती हैं। उनके आने के बाद दोनों ने उस लाश को कंधे पर उठाया और पैदल चलकर दो किलो मीटर दूर खड़ी एम्बुलेंस तक पहुंचाया।

कोट्टुरू को मिल रही बधाई

आंध्रप्रदेश पुलिस ने कोट्टुरू के द्वारा किए गए इस नेक काम का वीडियो बनाकर ट्विटर पर पोस्ट किया है। उसके बाद से कोट्टुरू को उनके काम के लिए हर तरफ से शाबाशी और दुआएं मिल रही हैं। अब तक इसके लिए उन्हें 400 से ज़्यादा फोन कॉल तो वही 100 से ज़्यादा संदेश आ चुके हैं। कोट्टुरू ने विशाखापट्टनम के सरकारी स्कूल से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की।उसके बाद उन्होंने विशाखा वुमन डिग्री कॉलेज’ से बी. फार्मेसी में ग्रेजुएशन पूरा किया। ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद कोट्टुरू को एक अच्छी नौकरी मिल सकती थी और इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी हो जाती परंतु उनके परिवार का सपना तो बेटी को पुलिस ऑफिसर बनता देखने का था।

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कोट्टुरू ने पूरा किया अपने पिता का सपना

कोट्टुरू ने अपने पिता के सपनों को अपना सपना बना लिया और उसे पूरा करने का फैसला कर लिया। साल 2014 से उन्होंने पुलिस में भर्ती की तैयारी शुरू कर दी। कोट्टुरू ने अपनी कड़ी मेहनत से पहली ही बार में सफलता प्राप्त किया और उनकी पहली नियुक्ति एक्साइज डिपार्टमेंट कांस्टेबल के रूप में हुई परंतु उनका सफर यही नहीं रुका। उसके बाद उन्होंने साल 2017 में एसआई की परीक्षा में सफलता प्राप्त की और अब उनका लक्ष्य डीएसपी बनने का हैं। कोट्टुरू अब पूरी लगन से उसकी तैयारी में जुटी हुई हैं।

कोट्टुरू को उनके पिता द्वारा मिली है प्रेरणा

कोट्टुरू के पिता ज़्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं परंतु उन्होंने हमेशा अपने बच्चों को यही सिखाया कि इंसानियत का धर्म सबसे ऊपर होता है। पिता द्वारा दिए सीख से कोट्टुरू को जीवन के किसी भी हाल में आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा मिली है। वह अपने पिता की ही सीख को मानते हुए अपनी नौकरी से समय निकालकर बूढ़े बच्चों और ज़रूरतमंदों की मदद करती रहती हैं। कोट्टुरू कहती हैं कि जब वह किसी की मदद करती हैं, तब उन्हें ऐसा लगता हैं कि वह भगवान शिव की सेवा कर रही हैं।

News Desk

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