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Monday, November 29, 2021
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बर्तन धोने से लेकर ऑक्सफोर्ड तक का सफर, फिर बनीं IPS, आइये जानते हैं

अपनी किस्मत को बदलना अपने हाथ में होता है। अगर हम चाहें तो किस्मत को समय रहते ही बदल सकते हैं। इसको बदलने का एक ही जरिया है और वो है मेहनत। मेहनत करके इंसान अपनी लकीरों को बदल सकता है और सफलता की बुलंदियों पर पहुँच सकता है।

आज हम आपको अपनी किस्मत को बदल कर अपनी एक नई पहचान बनाने वाली एक ऐसी ही शख्सियत हैं इल्मा अफ़रोज़ के बारे में बताएंगे जिन्होंने लोगों के घरों में बर्तन मांजने तक का काम किया पर कभी हिम्मत नहीं हारी और आज देश की सेवा के लिए आईपीएस ऑफिसर बनी हैं। आइये जानते हैं उनके बारे में।

इल्मा अफ़रोज़ का परिचय

इल्मा अफ़रोज़ उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के छोटे से गाँव कुंदरकी की रहने वाली है। इल्मा के इतिहास को और इनकी प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा को देखकर कोई अंदाज़ा भी नहीं लगा सकता था कि यह लड़की दिल्ली के स्टीफेन्स कॉलेज से लेकर, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और न्यूयॉर्क तक भी जा सकती है।

सामान्य परिवार में जन्म

इल्मा अफ़रोज़ का जन्म एक समान्य परिवार में हुआ था। इल्मा जब 14 साल की थी तभी असमय उनके पिता की मृत्यु गई थी। इल्मा से दो साल छोटा उनका भाई था। घर में अचानक से दुखों को पहाड़ टूट पड़ा था। उनकी मां को समझ नहीं आ रहा थी कि वो क्या करें। ऐसे में कुछ लोगों ने सलाह दी कि लड़की को पढ़ाने में अपने पैसे बर्बाद ना करें इसकी शादी कर दें। जिससे बोझ कम हो जाएगा।

इल्मा को माँ ने पढ़ाया

इल्मा की मां ने लोगों की बात नहीं सुनी। इल्मा पढ़ाई में शुरू से ही तेज थी। वो हमेशा अव्वल आती थीं। इसलिए उनकी मां ने उनकी शादी के लिए पैसे ना जोड़कर उनकी पढ़ाई में पैसे लगा दिए। इल्मा ने अपनी मेहनत के दम पर स्कॉलरशिप्स पाना शुरू कर दिया। इल्मा कि पूरी हायर स्टडीज़ स्कॉलरशिप्स के माध्यम से ही हुई। इल्मा को दिल्ली के सेंट स्टीफेन्स कॉलेज में एडमिशन मिल गया था।सेंट स्टीफेन्स से ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त करने के बाद इल्मा को मास्टर्स के लिये ऑक्सफोर्ड जाने का अवसर मिला।

बर्तन धोने पड़े इल्मा को

इल्मा यूके में अपने बाक़ी खर्चें पूरे करने के लिये कभी बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती थी तो कभी छोटे बच्चों की देखभाल का काम करती रही। यहाँ तक कि वो लोगों के घरों में बर्तन भी धोया करती थी। ताकि उनका खर्च निकल पाए।इतना कुछ करने के बाद इल्मा एक वॉलेंटियर प्रोग्राम में शामिल होने न्यूयॉर्क गयीं, जहाँ उन्हें बढ़िया नौकरी का ऑफर मिला। इल्मा चाहती तो यह ऑफर ले लेती और विदेश में ही बस जाती लेकिन इल्मा ने ऐसा नहीं किया। वो अपने देश के लिए ही सेवा करना चाहती थी।

यूपीएससी की तैयारी की

इल्मा जब न्यूयॉर्क से वापस आईं तब उनके उन्होंने यूपीएससी करने का विचार किया। इल्मा इसकी तैयारी करने में जुट गई। साल 2017 में 26 साल की इल्मा को 217वीं रैंक प्राप्त हुई। वो यूपीएससी की परीक्षा में पास हो गई। इसके बाद जब सर्विस चुनने की बारी आयी तो उन्होंने आईपीएस चुना।

इल्मा ने अपनी मेहनत और आगे बढ़ने की सोच के कारण सफलता पाईं। आज उनकी जितनी तारीफ की जाए कम है।

Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।
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