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Saturday, June 25, 2022
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16 वर्षीय राकेशकृष्ण ने बनाई किसानों के लिए मशीन

सफलता के आगे उम्र कभी भी बाधा उत्पन्न नही करती है।जोश और जज्बा हो तो किसी भी उम्र में इंसान सफल हो सकता है।

आज हम आपको एक ऐसे लड़के की कहनी बताएंगे जिसने मात्र 16 साल की उम्र में एक ऐसी मशीन बनाई है जो किसान को खेती में बहुत मदद करेगा।

राकेशकृष्ण के. ने बनाई मशीन

कर्नाटक के दक्षिण कन्नडा के पुत्तुर में रहने वाले 16 वर्षीय राकेशकृष्ण के. मंगलुरु के एक्सपर्ट पीयू कॉलेज में 12वीं कक्षा के छात्र हैं। उन्होंने किसानों की सुविधा के लिए एक खास तरह की मशीन बनाई है, जिससे किसान खेती में बहुत ही आसानी से कई तरह की फसलों के बीजों की रोपाई कर सकते हैं। बीजों की रोपाई के अलावा भी यह मशीन और कई काम करती है। उन्होंने अपनी मशीन को ‘सीडोग्राफर’ नाम दिया है। यह मशीन किसानों के लिए बहुत उपयोगी है।

बहन से मिली मशीन बनाने की प्रेरणा

राकेश को मशीन बनाने की प्रेरणा उन्हें अपनी बड़ी बहन रश्मिपार्वती से मिली। उनकी बहन बायोलॉजी के क्षेत्र में जर्मनी से पीएचडी कर रही हैं। उनकी बहन हमेशा अपने साइंस प्रोजेक्ट्स में लगी रहती थीं। उन्होंने अपने कई प्रोजेक्ट्स के लिए अंतर्राष्ट्रीय गोल्ड मैडल भी जीते है। वह राकेश के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा रही हैं। हालांकि, उनका विषय बायोलॉजी है और राकेश को मैकेनिकल क्षेत्र में रूचि है। लेकिन अपनी बहन के साथ से उन्हें बहुत सहयोग मिला।

किसानों के लिए मशीन बनाई

राकेश ने साल 2015 में अपने इस प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू किया। उन्होंने महसूस किया कि फसल की रोपाई के समय उनके पिता को और दूसरे किसानों को बहुत ज्यादा परेशानी होती है। ज्यादातर किसान या उनके खेतों में काम करने वाले लोग हाथ से बीजों को खेतों में फेंकते हैं। लेकिन इस प्रक्रिया में खेत में समान रूप से रोपाई नहीं हो पाती है।साथ ही, बीजों के अंकुरित होने की दर भी कम रहती है। इस कारण किसानों को उत्पादन भी कम मिलता है। किसानों को एक ऐसी मशीन की जरूरत है जो व्यवस्थित ढंग से रोपाई करे।

कई तरह से काम करती है मशीन

राकेश अपने मशीन को मुख्य रूप से रोपाई के लिए तैयार किया गया था, लेकिन पिछले चार-पांच वर्षों में इसमें कई तरह के बदलाव किए हैं और अब यह मल्टीपर्पज मशीन की तरह इस्तेमाल हो सकती है। मशीन से कई फसलों के बीजों की आसानी से रोपाई कर सकते हैं। साथ ही, बीज लगाने के बाद मशीन से ही उसे पानी और खाद भी दिया जा सकता है। साथ ही, इसमें एक प्लेट भी लगी है, जो बीज जमीन में बोने के बाद, इसके ऊपर मिट्टी डालती है, जिससे कोई पक्षी या कीड़ा बीजों को खाये नहीं।

कई तरह के सम्मान से सम्मानित

सीडोग्राफर से धान, रागी, ज्वार, और चना जैसी फसलों के बीजों की आसानी से रोपाई किया जा सकता है। राकेश को केंद्र सरकार के विज्ञान और तकनीक विभाग द्वारा आयोजित नैशनल ‘इंस्पायर अवॉर्ड’ मिला है। उन्हें 2017 में नैशनल इनोवेशन फेस्टिवल के दौरान राष्ट्रपति भवन में भी तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को अपने इस अविष्कार को दिखाने का मौका मिला था। इस साल उन्हें प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल शक्ति पुरस्कार के लिए चुना गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनसे वर्चुअल मुलाक़ात की और इस मशीन के बारे में जानकर उनकी सराहना की थी।

आज राकेशकृष्ण के. हर युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। उनसे सभी युवाओं को सिख लेने की जरूरत है।

Shubham Jha
Shubham वर्तमान में पटना विश्वविद्यालय (Patna University) में स्नात्तकोत्तर के छात्र हैं। पढ़ाई के साथ-साथ शुभम अपनी लेखनी के माध्यम से दुनिया में बदलाव लाने की ख्वाहिश रखते हैं। इसके अलावे शुभम कॉलेज के गैर-शैक्षणिक क्रियाकलापों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।
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