UPSC में असफल इस बिहारी ने खड़ा कर दिया सैकड़ों का कारोबार

इंसान को नाकामयाबी से ना कभी डरना चाहिए और ना ही कभी उदास होना चाहिए। हालांकि कुछ लोग असफलता से थक कर बैठ जाते हैं, जो गलत है। असफलता एक ऐसी सीख है, जो सफल होने का मार्गदर्शन करती है, जिससे मनुष्य असफल होकर भी बहुत कुछ सीखता है।

ऐसे ही एक किसान हैं, सत्यजीत सिंह। जिन्होनें यूपीएससी में असफलता हाथ लगने के बाद भी गांव में ही कृषि से करोड़ों का साम्राज्य स्थापित कर लिया।

सत्यजीत सिंह का परिचय

उनका जन्म बिहार के जमुई के वरिष्ठ अधिवक्ता स्वर्गीय रंजीत सिंह के यहां हुआ था। सत्यजीत ने पटना यूनिवर्सिटी से इतिहास विषय से M.A की शिक्षा पूरी करने के बाद सिविल सर्विसेज की तैयारी की लेकिन निराशा हाथ लगी। असफल होने के बाद उन्होंने टीवी कम्पनी बीपीएल के लिये कार्य करने लगे, इसी कार्य के सिलसिले में वह एक बार बेंगलुरु गये थे, जहां से लौटते वक्त उनकी भेंट मखाना नेशनल रिसर्च संस्थान के डायरेक्टर डॉक्टर जनार्धन से हुई। उनकी इस मुलाकात ने उनके जीवन की दिशा और दशा दोनों को बदल दिया।

Satyajit singh raised his business after being unsuccessful in UPSC

किसानों को मिलते थे प्रति किलों पर 60 रुपए

डॉक्टर जनार्धन से मिलने के बाद सत्यजीत ने अपनी पूरी उर्जा को मखाना की खेती में झोंक दिया। वह मखाना के किसानों से मिलने लगे और उनकी समस्याओं एवं जरूरतों को समझने लगे। उसके बाद उन्होंने शक्ति सुधा नाम से एक कम्पनी शुरु की। सत्यजीत ने बताया कि वर्ष 2007 तक मखाना के किसानों को 60 रुपए प्रति किलो मिलते थे, जबकी अभी स्थिति ऐसी है कि मखाना उपजाने वाले किसान 450 रुपए से अधिक दाम प्रति किलो प्राप्त कर रहे हैं।

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वर्ष 2022 के लिये एक हज़ार करोड़ का लक्ष्य

सत्यजीत सिंह ने मखाना के बल पर एक छोटी सी शुरुआत की थी, जो अब वटवृक्ष बन गई है। उनकी कम्पनी से 15000 किसान जुड़े हैं। वर्ष 2018 में उनकी कम्पनी का टर्न ओवर 167 करोड़ के पार था और अब उन्होंने वर्ष 2022 के लिये एक हज़ार करोड़ से अधिक के टर्न ओवर का लक्ष्य निर्धारित किया हैं।

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गांव के पैदावार को उद्योग में किया तब्दील

सत्यजीत सिंह ने अपने जुनून से बिहार के पैदावार जो निराशा के सागर में डूब रही थी, उसे एक बेहतरीन उद्योग में तब्दील कर दिया। वर्तमान में उनकी कम्पनी 18 से अधिक राज्यों और विश्व के लगभग 22 देशों में कारोबार कर रही है।

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कई अवार्ड्स से हो चुके हैं सम्मानित

सत्यजीत सिंह ने अपने बेहतरीन प्रयासों के वजह से अनेकों अवार्ड्स अपने नाम कर चुके हैं। वर्ष 2006 में वह चौधरी चरण सिंह अवार्ड से सम्मानित हुए, उसके बाद वर्ल्ड बैंक ने उन्हें इनोवेशन अवार्ड से पुरस्कृत किया। इसके अलावा भारत के प्रतिष्ठित मैनेजमेंट कॉलेज IIM अहमदाबाद की किताब ‘कनेक्ट द डॉट्स’ में उनका नाम शामिल किया गया है। IIM ने उन्हें ऐसे 20 उद्यमियों के बीच जगह दी, जिन्होंने बगैर MBA की डिग्री लिये स्वयं का सफल कारोबार स्थापित कर दिखाया।

News Desk

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