कैलाश सत्यार्थी ने शेयर की राजेश की कहानी, बाल मज़दूरी से दिल्ली यूनिवर्सिटी तक का सफर

हमारे अंदर अगर हुनर है, तो यह अमीरी-गरीबी और ना ही उम्र को देखती है। हमारा हुनर हमें खुद को निखारने के साथ अन्य व्यक्तियों का मनोबल भी बढ़ाता है। प्रस्तुत है आज का हमारा यह लेख।‌ यह एक ऐसे लड़के की कहानी है, जिसने बचपन में ईंट-भट्टे पर कार्य कर अपना बचपन गुजारा लेकिन अब अपने हुनर और मेहनत के दम पर दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीएससी किया।

अगर हमें आज़ादी मिले तब हम भी शिखर की ऊंचाई पर चढ़ सकते हैं, ऐसे कहने वाले बच्चों में से एक हैं राजेश (Rajesh). वह पहले बाल मज़दूरी किया करते थे और अब गरीब बच्चों के लिए उदाहरण बन गए हैं।

Rajesh story from being labour to a bachelor

राजेश ने दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University) से बीएससी किया है, लेकिन इनकी संघर्ष की कहानी बहुत ही कम व्यक्ति जानते हैं। उनकी कहानी नोबल विजेता सामाजिक कार्यकर्ता “कैलाश सत्यार्थी (Kailash Satyarthi) ने अपने ट्वीट पर शेयर किया है।

कैलाश सत्यार्थी ने राजेश की फोटो अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर करते हुए लिखा, “अपने बेटे राजेश पर मुझे गर्व है, जिसने कभी बाल मज़दूरी की और जब उसे आज़ादी का मौका मिला तब उसने कर दिखाया। सभी बच्चों में कुछ भी कर गुजरने की क्षमताएं भरी होती हैं। राजेश ने फर्स्ट डिवीजन के साथ दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीएससी में सफलता प्राप्त किया है।”

Rajesh story from being labour to a bachelor

कैलाश जी के इस ट्वीट पर शशि थरूर ने कहा “यह कहानी बेहतरीन है, आपने एक बाल मज़दूरी कर रहे बच्चे को आज़ादी दिया, जो आगे चलकर सितारा बनेगा।”

News Desk

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