ज़मीन लीज पर लेकर पिता-बेटी कर रहे ऑर्गेनिक खेती, सबको शुद्ध खाना देना है उद्देश्य

एक ओर जहां लोग खेती करने को मज़बुर हैं, तो वही कुछ ऐसे भी लोग हैं, जिन्हें खेती करना पसंद है। आज हम 72 साल के बद्रीदास बंसल (Badridas Bansal) की बात करेंगे। बद्रीदास पंजाब (Punjab) के संगरूर के रहने वाले हैं। वह बिजली विभाग से रिटायर्ड हो चुके हैं परंतु नौकरी के दौरान भी वह घर के पास की खाली ज़मीन पर ऑर्गेनिक तरीके से सब्जियां पैदा करते थे और उन सब्जियों का इस्तेमाल वह अपने घर के लिए करते थे तथा जो कुछ बचता था, वह रिश्तेदारों में बांट देते थे।

प्रियंका करती हैं खेती में बद्रीदास की मदद

बद्रीदास को खेती करना बहुत पसंद था इसलिए उन्होंने यह फैसला किया कि रिटायरमेंट के बाद वह खेती ही करेंगे, परंतु रिटायरमेंट से पहले ही उनकी पत्नी की मृत्यु हो गई। उसके बाद बद्रीदास संगरूर चले गए। संगरूर में उन्होंने चार एकड़ ज़मीन लीज पर लिया और मल्टी क्रॉपिंग की खेती शुरू कर दी। बद्रीदास की 45 साल की बेटी प्रियंका गुप्ता (Priyanka Gupta) ने खेती में अपनी पिता की मदद करनी शुरू की। प्रियंका ने इसमें बहुत से बदलाव किए, जिससे अब उनके खेत में पैदा होने वाले उत्पाद प्रोसेस होकर बाज़ार तक जा रहे हैं।

Priyanka and her father badridas doing organic farming

अब प्रियंका संभाल रही हैं खेती के काम

प्रियंका लुधियाना में रहती हैं और वह हफ्ते में तीन दिन लुधियाना से संगरूर अपने पिता के मदद के लिए आती हैं। वह दोनों मिलकर ऑर्गेनिक तरीके से उगाए उत्पादों को प्रोसेस कर सीधा ग्राहकों तक पहुंचाते हैं। बद्रीदास को इस बात की बहुत खुशी है कि वह खुद भी शुद्ध खा रहे हैं और लोगों को भी शुद्ध खिला पा रहे हैं। इस उम्र में भी बद्रीदास अपना ज़्यादा समय फार्म पर बिताते हैं, लेकिन अब खेती का पूरा काम उनकी बेटी प्रियंका ही संभाल रही हैं।

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प्रियंका अपने खेत का नाम मदर अर्थ ऑर्गेनिक फार्म रखी हैं

प्रियंका फाइनेंस में एमबीए कर चुकी हैं। प्रियंका ने अपने चार एकड़ की खेत का नाम ‘मदर अर्थ ऑर्गेनिक फार्म’ रखा है और वह इसी नाम से अपने प्रोडक्ट्स को बाज़ार तक पहुंचा रही हैं। प्रियंका बताती हैं कि वह चार एकड़ में दाल, मक्का, बाजरा, चना, ज्वार, तिल, अलसी, हल्दी और हरी सब्जियां तथा आम, अमरूद, आंवला, तुलसी, नीम, ब्राह्मी, मोरिंगा और स्टीविया के भी प्लांट उगाते हैं। बद्रीदास खेत में पैदा होने वाली उपज कभी बेचते नहीं थे। वह उसे लोगों में बांट दिया करते थे परंतु जब से प्रियंका खेती का काम संभालने लगीं, वह पैदावार को प्रोसेस कर बाज़ार तक पहुंचाने लगे।

Priyanka and her father badridas doing organic farming

कुछ इस तरह हुई फूड प्रोसेसिंग की शुुरुआत

प्रियंका बताती हैं कि एक बार उनके खेत में हल्दी की पैदावार काफी अच्छी हुई थी। उन्होंने घर-परिवार, रिश्तेदारों को दिया। उसके बाद भी काफी हल्दी बच गई, तब प्रियंका ने कच्ची हल्दी का अचार बना दिया। उस अचार को लोगों ने खूब पसंद किया और उनसे अपने लिए बनाने को कह दिया, इससे उन्हें आइडिया आया कि क्यों ना हम अपने खेत में होने वाली कुछ पैदावार को प्रोसेस करके बेचें और यहीं से उन्होंने फूड प्रोसेसिंग की शुुरुआत की।

प्रियंका अब प्रोसेसिंग के जरिए करीब 20-25 तरह के उत्पाद बनाती हैं।

घर पर ही करते हैं प्रोसेस तथा पैकिंग का काम

संगरूर में बद्रीदास के घर की किचन से ही प्रोसेस का कार्य होता हैं और वही से पैक करके इसे बाज़ार में भेजा जाता है। वह हल्दी, लहसुन, गाजर, हरी मिर्च, करौंदा, मूली, आम से अचार, जैम आदि तैयार करती हैं। इसके अलावा ज्वार, बाजरा और मक्के से बिस्कुट और आटा भी तैयार करती हैं। इसके लिए प्रियंका ने पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से फूड प्रोसेसिंग की ट्रेनिंग भी ली है।

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5 महिलाओं को मिला रोज़गार

प्रियंका प्रोसेसिंग के काम के लिए आसपास के गांवों की 5 महिलाओं की मदद लेती हैं। प्रियंका कहती हैं कि यह महिलाएं ही मेरी सबसे बड़ी ताकत हैं, मेरी गैरमौजूदगी में यह लोग खेत से लेकर प्रोसेसिंग और पैकिंग तक सब कुछ संभाल लेती हैं। इससे उनको भी रोज़गार मिल गया है। प्रियंका बताती हैं कि लोग उनके द्वारा तैयार किये उत्पाद को बहुत पसंद करते हैं और आसपास के लोग सीधे उनके फार्म से ही रॉ और प्रोसेस्ड प्रोडक्ट खरीद लेते हैं। साथ ही प्रियंका चार रिटेलर्स तक भी अपने फार्म में उगाए तथा प्रोसेस किए ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स पहुंचाती हैं।

अन्य किसान भी हो रहे हैं प्रेरित

प्रियंका खाद तथा जैविक पोषण भी खुद तैयार करती हैं। इसके लिए वह गांव से ही गोबर और गौमूत्र लेते हैं। इनसे ही खेतों के लिए जैविक खाद, पोषण और कीटनाशक बनाए जाते हैं। बद्रीदास ने जिस उद्देश्य से जैविक खेती कि शुरूआत कि थी अब वह पूरा होता दिख रहा है। प्रियंका को इस बात की बहुत खुशी है कि उनके पिता का उद्देश्य पूरा हो रहा है। अब अन्य किसान भी जैविक खाद के महत्व समझ रहे हैं और उसे अपना रहे हैं। प्रियंका बताती हैं कि कभी उनके खेत में कुछ किसान उनकी खेती करने के तरीके को देखने आए। वह खेतों में केंचुए देखकर हैरान रह गए। तब उन्हें यह समझ आया कि केमिकल्स की वजह से ही अब खेतों में केंचुए नहीं दिखते हैं।

Priyanka and her father badridas doing organic farming

खुद शुद्ध खाना और दूसरों को खिलाना है उद्देश्य

प्रियंका बताती हैं कि उनके पिता ने कभी पैसों के लिए खेती नहीं की। उनके रोज़गार के लिए उनकी पेंशन ही काफी है। वह बस इस उद्देश्य से खेती कर रहे हैं कि वह खुद शुद्ध खाना खा सकें और साथ ही लोगों को भी शुद्ध व जैविक खाना खिला सकें। प्रिंयका बताती हैं कि वह लीज की ज़मीन पर खेती करते हैं, इसमें उन्हें सालाना 2 लाख रुपए लीज के पैसे देने पड़ते हैं। प्रियंका कहती हैं कि अगर किसी के पास अपनी ज़मीन हैं तब वह मल्टी क्रॉपिंग खेती के जरिए अच्छी कमाई कर सकते हैं।

प्रियंका किसानों को जैविक खेती के लिए करती हैं प्रेरित

प्रियंका का मकसद हर किसी को जैविक खेती के लिए प्रेरित करने का है क्योंकि उनका मानना है कि अगर हम अभी नहीं संभले तो आने वाली पीढ़ियों के लिए यह बहुत बड़ा नुकसान होगा। हम उनके लिए सिर्फ़ जहरयुक्त भोजन ही छोड़ कर जाएंगे। इसके अलावा प्रियंका कहती हैं कि अगर किसी को जैविक खेती के बारे में कुछ भी पूछना हो या समझना हो तो उनसे पूछ सकते हैं। साथ ही अगर आप बद्रीदास और प्रियंका के फार्म पर होने वाली खेती को देखना चाहते हैं, तो प्रियंका उनका तहे दिल से स्वागत करती हैं।

News Desk

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