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Sunday, December 4, 2022
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OYO के ब्रांड बनने की कहानी:सिर्फ 30 रुपए बचे थे, उससे रितेश अग्रवाल ने 8 साल में खड़ी की 75 हजार करोड़ की कंपनी

नकारात्मक सोच वाले दुनिया की डर से अपने फैसले बदल देते है,
जबकि सकारात्मक सोच वाले अपने फैसले से दुनिया बदल देते हैं।

इस बात को प्रमाणित करने का काम किया है ओयो रूम्स के फाउंडर श्री रितेश अग्रवाल ने। जिस उम्र में लोग पढ़ाई-लिखाई करते हैं उस उम्र में श्री रितेश अग्रवाल हजारों करोड़ की कंपनी खड़ी करके नई मिसाल पेश कर रहे हैं। 24 साल की उम्र होने तक श्री रितेश अग्रवाल 71 हजार करोड़ के मालिक बन गए थे। घूमने-फिरने के शौक को ही उन्होंने अपना करियर बना लिया। आइये जानते हैं उनके बारे में।

छोटे से शहर के निवासी

उड़ीसा एक छोटे से शहर बिसम कटक में जन्में श्री रितेश अग्रवाल को बचपन से ही घूमने-फिरने का बहुत शौक था। रितेश जी की शुरूआती पढ़ाई अपने ही जिले में एक स्कूल से हुई और उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए वो दिल्ली चले गए। दिल्ली में रितेश जी ने इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस अकादमी में एडमिशन लिया। लेकिन उनके दिमाग में कुछ और ही चल रहा था और उन्होंने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी।

बिज़नेस करने का आइडिया

रितेश अग्रवाल टीवी के रिमोट पर अपना कंट्रोल रखने की इच्छा की वजह से ओयो रूम्स की शुरूआत करने के लिए प्रेरित हुए। एक समय उनके घर में बच्चों और रिश्तेदारों को कई बार एक ही कार्यक्रम एक साथ देखना पड़ता था। रिश्तेदारों के घर टीवी के रिमोट पर उनका कंट्रोल नहीं होता था। इसी वजह से उन्होंने सोचा कि क्यों ना एक अलग रूम बनाया जाए। इसके बाद वो एक बार पहाड़ों में घूमने गए लेकिन वहां होटल रूम्स की किल्लत ने उन्हें कुछ नया करने की सलाह दी। बस फिर क्या था उन्होंने अपनी इस सोच को सच करने का निर्णय ले लिया।

असफलता के बाद भी हार नही मानी

ओयो रूम्स के संस्थापक रितेश अग्रवाल ने OYO रूम्स के जरिए सफलता प्राप्त करने से पहले 6 बार असफलता का सामना किया था। साल 2012 में श्री रितेश ने OREVAL STAYS नाम की एक ऑनलाइन रूम बुकिंग करने की कंपनी खोली। रितेश का यह आइडिया इतना यूनिक था कि उससे इंप्रेस होकर गुड़गांव के मनीष सिन्हा ने ओरेवल में इनवेस्ट किया और को-फाउंडर बन गए। इस कंपनी का उद्देश्य लोगो को कम दाम में अच्छे रूम उपलब्ध करवाना था। कंपनी की शुरूआत के कुछ समय बाद ही उन्हें अपने स्टार्टअप के लिए कई लाख रूपयों का फंड मिल गया। लेकिन कुछ समय बाद ही उनकी यह कंपनी बंद हो गई।

आगे बढ़ने का पूरा प्रयास

साल 2012 की सर्दियों की एक शाम में 18 साल के श्री रितेश अग्रवाल दिल्ली की मस्जिद मोठ मार्केट में चुपचाप बैठे थे क्योंकि उनके पास सिर्फ 30 रुपये थे और ओरावेल स्टेज नाम का एक असफल स्टार्टअप था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और आगे बढ़ने का फैसला किया। उन्होंने अपनी पिछली गलतियों से सीखते हुए 2013 में अपनी कंपनी OREVAL STAYS को फिर से एक नए नाम के साथ शुरू किया। उन्होंने अपनी कंपनी का नया नाम OYO Room रखा जिसका मतलब था ‘आपके अपने कमरे‘।

दूसरे कंपनी के द्वारा निवेश

श्री रितेश की कंपनी में 4 करोड़ का निवेश किया और फिर सन् 2016 में जापान की कंपनी SOFT BANK ने भी सात अरब रुपये निवेश किये जो की एक नयी कंपनी के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। देखते ही देखते OYO रूम्स का बिज़नेस भारत सहित विदेशों में भी फैल गया। कभी चंद रूपयों से शुरू हुई OYO रूम्स कंपनी आज हजारों करोड़ की बन चुकी है। श्री रितेश अग्रवाल आज 19 हजार करोड़ की कंपनी के मालिक हैं।

आज उनकी जितनी भी तारीफ की जाए कम है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि इंसान के लिए कोई मंजिल दूर नही है।

Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।
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