भारतीय मूल की महिला ने जीता ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी छात्र संघ का चुनाव

इस समाज ने जितना महिलाओं को कमज़ोर समझा, वह उतने ही बुलंदियों को छुती गई। पहले भी कई महिलाएं ऐसी थी, जिन्होंने मुश्किल परिस्थितयों में भी अपनी खुद की एक पहचान बनाई और अपने कार्य से इतिहास रचने का काम किया।
आज हम एक ऐसी ही भारतीय महिला के बारे में बात करेंगे, जिन्होंने ब्रिटेन विश्व विख्यात ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के छात्र संघ में अध्यक्ष पद का चुनाव जीतकर दुनिया में अपना परचम लहराया है। उनका नाम रश्मि है, और वह कर्नाटक के मनिपाल की रहने वाली हैं।

कर्नाटक के मनिपाल की रहने वाली रश्मि ने ब्रिटेन विश्वविख्यात ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के छात्र संघ में अध्यक्ष पद का चुनाव जीता है। इस चुनाव में उन्हें अन्य तीन प्रतिद्वंदियों से ज़्यादा वोट मिले। उन्हें कुल 3708 वोटों में से 1966 वोट हासिल हुए।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी का यह चुनाव केवल रश्मि के जीत के लिए ही खास नहीं है बल्कि इसलिए भी खास है, क्योंकि इस बार यहां रिकॉर्ड वोटिंग हुई है। इस चुनाव के दौरान 4588 छात्रों ने अलग-अलग पदों के लिए 36405 वोट डाले थे। रश्मि ने अपनी चुनावी कैंपेन में चार प्राथमिकताओं को छात्रों के सामने रखा था, जिसमें तीन बहुत ख़ास थे। यूनिवर्सिटी में उपनिवेशवाद से मुक्ति करने तथा समावेशिता, वैश्विक महामारी कोविड-19 की रोकथाम, छात्रों की मेंटल हेल्थ पर ध्यान देना शामिल था।

Oxford University student election winner rashmi native of India

रश्मि के पिता का नाम दिनेश और मां का नाम वातसला है। उनके पिता एक बिजनेसमैन हैं और मां हाउसवाइफ हैं।
रश्मि ने मनिपाल और उडुपी से अपनी स्कूल की पढ़ाई पूरी की थी। उनके पिता का व्यवसाय उडुपी से कुछ ही दूरी पर है। रश्मि ने मनिपाल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त करने के बाद ऑक्सफोर्ड में जाने का विचार किया था। वहीं वह एमआईटी में भी छात्र यूनियन की टेक्निकल सेक्रेटरी थी।

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रश्मि ने एमआईटी में मनिपाल हैकथॉन की भी शुरूआत की थी। यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष होने के नाते वह चाहती थीं कि वहां छात्रों के मेंटल हेल्थ के लिए ज्यादा से ज्यादा फंडिंग हो सके। इतना ही नहीं वह युनिवर्सिटी (University) में जीवाश्म इंधन को भी बढ़ावा देना चाहती हैं। उन्होंने अपने चुनाव कैंपेन में होमोफोबिया और ट्रांस्फोबिया से लड़ने की बात भी कही थी और कहा था कि लोगों के बीच LBGT समुदाय को लेकर जो मानसिकता है, उसको भी बदलने की जरूरत है।

सामंत के साथ कुछ और भारतीयों ने भी इस चुनाव में अपनी जीत दर्ज़ की है। उन्होंने साल 2021-22 के लिए देविका उपाध्याय ग्रैजुएट्स इलेक्ट और धिती गोयल , स्टूडेंट् ट्रस्टीज के पद के लिए चुनी गई हैं। अगर सामंत की बात करें, तब वह क्लाइमेंट चेंज को लेकर काफी गंभीर है। बता दें कि जून 2016 से मई 2017 तक रश्मि मैसाच्यूसेट इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के एडिटोरियल बोर्ड में बतौर लेखिका रह चुकी हैं। रश्मि ने गोवा शिपयार्ड लिमिटेड से अपनी इन्टर्नशिप पूरी की और साल 2018 में उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ केमिस्ट्री एंड टेक्नोलॉजी में रिसर्च असिस्टेंट का भी काम किया। इतना ही नहीं बल्कि वह ऑक्सफोर्ड एवियशन सोसायटी के महासचिव भी रह चुकी हैं।

News Desk

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