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Sunday, January 16, 2022
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एक यात्रा के दौरान बीच सड़क उतार गया था ड्राइवर, बना दी OLA जैसी कंपनी, पढ़ें भाविश अग्रवाल की कहानी

जो लोग ज़िंदगी में आगे बढ़ने की ख्वाहिश रखते हैं और मेहनत करते जाते हैं वो सफल जरूर होते हैं। मेहनत से ही ज़िंदगी में सफलता पाई जा सकती है। बिना मेहनत के कुछ भी आसान नही होता है।

आज हम आपको Ola कैब के संस्थापक भाविश अग्रवाल के बारे में बताएंगे जिन्होंने बहुत कम समय में अपनी मेहनत से ओला कैब को आज भारत की सबसे सफल कंपनियों में से एक होने का गौरव हासिल कराया है। कम्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग करने वाले श्री भाविश ने कभी माइक्रोसॉफ्ट की अच्छी खासी नौकरी को छोड़ कर अपना बिज़नेस करने की ठानी थी। किराए पर मिलने वाली ओला कैब की शुरूआत कर श्री भाविश अग्रवाल ने आज अरबों की कंपनी खड़ी कर दी है। आइये जानते हैं उनके बारे में।

आगे बढ़ने की ललक

पंजाब के लुधियाना शहर के एक मध्यम वर्गीय परिवार में जन्में भाविश अग्रवाल बचनप से ही कुछ अलग करना चाहते थे। श्री भाविश ने मुंबई के Indian Institute of Technology से कंप्यूटर साइंस में बी-टेक इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी। जिसके बाद वो Microsoft company में रिसर्च करते हुए जॉब करने लगे। रिसर्च के दौरान ही उन्हें इसके लिए दो पेटेंट भी प्राप्त हो चुके थे लेकिन वो अपनी इस नौकरी में खुश नहीं थे क्योंकि वो कुछ अलग करना चाहते थे। भीड़ से हटकर अपनी एक खास पहचान बनाना चाहते थे।

कंपनी शुरू करने की योजना

माइक्रोसॉफ्ट में जॉब करते समय एक बार श्री भाविश कहीं ट्रेवल करने गए। इस यात्रा का अनुभव उनके लिए बहुत बुरा साबित हुआ। बेंगलुरु से बांदीपुर की यात्रा के लिए उन्होंने एक कार बुक की थी, जिनकी सर्विस बहुत ही ज्यादा खराब थी। जब वे बेंगलुरु से बांदीपुर की यात्रा पर निकले तो आधे रास्ते में ही ड्राईवर उनसे तय से ज्यादा पैसे मांगने लगा। जब उन्होंने मना किया को ड्राइवर ने उनके साथ बुरा बर्ताव किया। जिसके कारण वो बीच यात्रा में ही उतर गए और बाकी की यात्रा उन्होंने बस से तय की। जब वे बस में थे और आगे का सफ़र तय कर रहे थे तो उनके दिमाग में बस यही ख्याल आ रहा था कि ऐसे बहुत से लोग भी होंगे जिन्हें अच्छी कार सर्विस नहीं मिल रही होगी और उनके साथ भी ऐसा ही कुछ हो रहा होगा। तभी उन्हें लगा कि उनके जैसे ही बाकी कस्टमर्स एक अच्छी कैब सर्विस की तलाश कर रहे होंगे जो उन्हें क्वालिटी सर्विस प्रदान कर सके।

लोगों ने उड़ाया मज़ाक

भाविश अग्रवाल ने जब अपने स्टार्टअप बिज़नेस की शुरुआत करने की सोची तो दोस्तों और रिश्तेदारों ने उनका मज़ाक बनाया। उनके परिवार ने भी उनके फैसले पर कई सवाल खड़े किए। शुरुआत में उनके माँ-पापा को लग रहा था कि इतना पढ़ने और नौकरी छोड़ने के बाद कोई ट्रेवल एजेंट बनने का सोच रहा है लेकिन श्री भाविश ने किसी की बातों की परवाह नहीं की और अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते चले गए।

ओला कैब सर्विस की शुरुआत

माइक्रोसॉफ्ट की नौकरी को छोड़कर श्री भाविश अग्रवाल ने जोधपुर के रहने वाले अपने आईआईटियन दोस्त अंकित भाटी के साथ मिलकर Olatrips.com वेबसाइट शुरू की, जोकि आउट स्टेशन ट्रिप्स के लिए कैब मुहैया कराती थी। 2011 में मुंबई के पोबई में वन बीएचके फ्लैट से शुरुआत हुई थी। शुरू में भावेश को कई दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा। यहां तक की उन्होंने महिला अपनी पत्नी की कार को भी अपने बिज़नेस में इस्तेमाल कर लिया था। ओला को पहले राउंड की फंडिंग स्नैपडील के फाउंडर कुनाल बहल, रेहान यार खान और अनुपम मित्तल से मिली। इसके बाद फंडिंग का सिलसिला शुरू हो गया। ओला को अब तक 26 राउंड की फंडिंग में 48 इन्वेस्टर्स से 430 करोड़ डॉलर, यानी करीब 32 हजार करोड़ रुपए की फंडिंग मिल चुकी है।

अपनी कार नही खरीदी

भाविश अग्रवाल की कंपनी OLA कैब्स की खासियत यह है कि उन्होंने एक भी कार खरीदी नहीं है, उन्होंने सभी कैब्स को किराए पर ही लिया है और उन्हीं के माध्यम से यह बिजनेस चला रहे हैं। वह पूरे भारत में यात्रियों के लिए विभिन्न प्रकार की कैब सेवाएं प्रदान करने के लिए ड्राइवरों और टैक्सी मालिकों के साथ Partnership करते हैं। अपनी कैब कंपनी की सफलता को देखते हुए भावेश अग्रवाल ने यह फैसला कर लिया था कि वो कभी भी अपनी कार नहीं खरीदेंगे। इतने पैसे कमाने के बाद भी आज वो Ola कैब के जरिए ही ट्रेवल करते हैं।

सफलता की कहानी लिखी

ओला कैब कंपनी की सफल शुरूआत करने के बाद भाविश अग्रवाल नई कहानियां लिखते चले गए। साल 2015 में, कंपनी ने Ola Fleet नामक एक कैब लेंडिंग आर्म भी लॉन्च किया, जो OLA कैब्स की मूल कंपनी ANI Technologies Pvt Ltd. की सहायक कंपनी है। सितंबर 2015 तक, कंपनी का मूल्य लगभग $ 5 Billion पहुँच गया था। 2016 में, कंपनी ने एक और फ्लैगशिप सेवा Ola Play लॉन्च की जो दुनिया का पहला कनेक्टेड कार प्लेटफॉर्म बन गया, जो कम्यूटिंग अनुभवों को बदलकर इस स्पेस में ग्लोबल इनोवेशन के लिए टोन सेट कर रहा है।

आज उनकी जितनी भी तारीफ की जाए कम है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि कोई मंजिल दूर नही होती बस उस मंजिल को पाने की चाह होनी चाहिए।

Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।
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