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Saturday, January 22, 2022
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धर्मपाल गुलाटी MDH के मालिक : 5वीं तक की पढ़ाई,ऐसे बने भारत के मसाला किंग

ज़िंदगी कब किस ओर मुड़ जाए कोई नही जानता। समय का पहिया ऐसा चलता है कि एक गरीब एक पल में अमीर बन जाता है।

आज हम आपको एक ऐसे ही इंसान के बारे में बताएंगे जिनका एक छोटा से कारोबार जिसे उन्होंने अनजाने में अपने जीवन की पूर्ति के लिए शुरू किया था एक दिन वो मसालों का किंग MDH एक ब्रांड बन गया। आइये जानते हैं। मसालों के शंहशाह कहे जाने वाले स्वर्गीय श्री धर्मपाल गुलाटी जी के सफर के बारे में।

छोटा कारोबार की शुरुआत की

स्वर्गीय श्री धर्मपाल गुलाटी ने, एक बैलगाड़ी से छोटे मसाले की शुरूआत की थी जिसे चंद पुडियो में बांधकर इनके परिवार वाले बेचा करते थे। यह काम तो बस जीवन-व्यापन करने के उद्देश्य से शुरु किया गया था किसी को भी यह नहीं पता था कि एक आजीविका के रुप में किया गया काम को देश में ही नही विदेशों में भी जाना जाएगा।

मसाला की शुरुआत

विभाजन के समय उन्हें लाहौर से दिल्ली आना पड़ा,तब उनकी जेब में मात्र 1500 रुपए थे। इतने कम पैसे में गुजारा करना मुश्किल था। लेकिन किस्मत उन्हें दिल्ली बुला रही थी, वो दिल्ली आए और उन्होंने तांगा चलाना शुरू कर दिया, लेकिन तांगा चलाने में श्री धर्मपाल गुलाटी का मन नहीं लगा। उन्होंने तांगा अपने भाई को दे दिया, और इसके बाद दिल्ली के करोल बाग की अजमल खां रोड पर एक छोटा सा खोखा रख दिया और इसी खोखे में मसाले बेचना शुरू कर दिया।

घर-घर तक पहुँचा स्वाद

आज एमडीएच मसाले का स्वाद घर-घर तक पहुंच गया है। लोग इसे डाले बिना खाना नहीं बनाते। शादी हो या पार्टी एमडीएच मसाले हर जगह अपने स्वाद की खुशबू छोड़ आते हैं। तांगा चलाकर अपने मसालों को बेचने वाले स्वर्गीय श्री धर्मपाल गुलाटी ने, विभाजन से पहले इसकी शुरुआत की थी लेकिन विभाजन के बाद मसाले का विस्तार पूरे देश में हुआ। धर्मपाल गुलाटी जी को मसाला किंग के नाम से संबोधित किया जाता था।

अपने कर्मचारियों को अपना परिवार बनाया

गुलाटी जी ऐसे इंसान थे जिन्होंने अपने जीवन में कर्मचारियों को ही अपना परिवार माना। अंत तक आजीवन अविवाहित रहकर इन्होंने अपने व्यापार और अपने कर्मचारियों के बीच ही अपना संसार बसाया। धर्मपाल जी के बारे में यह बातें प्रसिद्ध हैं कि वो एक ऐसे इंसान थे जो अपने व्यपार में पूरा ध्यान लगाते थे।

अपने संस्कृति को बनाए रखा

इन्होंने अपने सभ्यता संस्कृति को भी कभी नहीं त्यागा। इस बात का उदाहरण वो मारवाड़ी पगड़ी थी जिसे धर्मपाल जी सदैव पहने रहते थे। सबके साथ इनका अपना एक अलग अंदाज़ था। जिसे दुनिया आज तक सलाम करती है। श्री गुलाटी सिर्फ पांचवीं पास थे और देश में उनका कारोबार दो हज़ार करोड़ रुपए का है।

आज स्वर्गीय श्री धर्मपाल गुलाटी लोगों के लिए प्रेरणा हैं।

Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।
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