पुलिस की नौकरी छोड़ शुरू की खेती, अब कमा रहे 3.5 करोड़ सलाना

अगर आप जीवन की चुनौतियों को स्वीकार कर आगे बढ़ते हैं, तब जीवन में सफलता जरूर मिलती है। आज हम एक सरकारी कर्मी की बात करेंगे, जिन्हें खेती में इतनी रुचि थी कि उन्होंने उसके लिए नौकरी तक को छोड़ दिया। जब उन्हें पारम्परिक खेती में कुछ बदलाव लाने का मौका मिला तब उन्होंने इसे कुछ इस तरीके से बदल दिया कि केवल मुनाफ़ा ही नहीं बढ़ा बल्कि ग्रामीणों को अपनी एक अलग पहचान भी दे दी।

पार्थीभाई जेठभाई चौधरी (Parthibhai Jethbhai Chaudhary) की कहानी

गुजरात (Gujarat) के बनासकांठा के दांतीवाडा के रहने वाले 59 वर्षय पार्थीभाई ने खेती के क्षेत्र को एक अलग उंचाई तक पहुंचाया है। उन्होंने अपने कार्य से खेती कर रहे किसानों को एक नई राह दिखाई है। पार्थीभाई पहले गुजरात पुलिस में काम करते थे परंतु उनका रुझान शुरू से ही खेती की ओर था। जिसके चलते 18 साल पहले ही पार्थीभाई ने पुलिस की नौकरी छोड़ दी। नौकरी के दौरान ही उन्हें विदेशी कंपनी मेकैन द्वारा ट्रेनिंग का अवसर मिला। मेकैन आलू से संबंधित उत्पाद बनाती है। इसके अलावा यहां किसानों को आलू के उत्पादन की ट्रेनिंग भी दी जाती है।

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पार्थीभाई ने मेकैन से आलू के उत्पादन की ट्रेनिंग ली

पार्थीभाई ने मेकैन से आलू कल्टीवेशन के सारे तकनीक सीखे। जब वह अच्छे से इस तकनीक को सीख चुके थे, तब उन्होंने आलू का उत्पादन शुरू किया। इस कार्य में पानी की कमी पार्थीभाई के लिए एक बहुत बड़ी समस्या बनी। इसके लिए उन्होंने पानी का ड्रिप इरिगेशन (द्रप्स सिंचाई) तकनीक का सहारा लिया। इस तकनीक से खेती करने से पानी और खाद दोनों की बचत होती है। पार्थीभाई कुछ इस तरीके से पानी का प्रयोग करते थे कि बूंद-बूंद पानी पौधे के जड़ों में टपकता था। पार्थीभाई बताते हैं कि वाल्व, पाइप या नालियों का निर्माण कर एक ऐसी संरचना बनाई जाती है, जहां पानी सिर्फ पौधों की जड़ों के आस-पास ही टपके।

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पार्थीभाई ने कि स्प्रिंकलर के मदद से खेती

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस विधि से सिंचाई करने पर पौधों को प्रतिदिन जरूरी मात्रा में पानी मिल जाता है। जिससे फसलों की बढ़ोतरी व उत्पादन जल्दी होती है इसलिए पार्थीभाई ने पानी की कमी को पूरा करने के लिए इस विधि की मदद ली। उन्होंने सबसे पहले अपने खेतों में स्प्रिंकलर लगवाए। जिसकी मदद से वह हर साल 750 एम.एम. पानी चाहने वाले स्‍थान पर बहुत कम पानी में ही काम चलाते है। पार्थीभाई शुरूआत के दिनों में अपने आलू सप्लाई केवल मेकैन में ही करते थे। जब पार्थीभाई को आलू के अच्छे दाम मिलने लगे तब वह अपने आलू बालाजी वेफर्स जैसी बड़ी चिप्स बनाने वाली कंपनी को भी सप्लाई करने लगे।

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पार्थीभाई देते हैं आलू की खेती की जानकारी

अब पार्थीभाई अपनी 87 एकड़ ज़मीन में आलू की खेती कर रहे हैं। वह हर साल 1 से 10 अक्टूबर के बीच खेतों में बुआई करते हैं और दिसम्बर तक उनकी फसल तैयार हो जाती है। पार्थीभाई बताते हैं कि इस मौसम में लगभग 1200 किलो प्रति हेक्टेयर आलू की पैदावार होती है। उनके खेतों में 2 किलोग्राम तक के एक आलू होते हैं। खेत में से आलू निकालने के बाद वह अपने आलुओं को कोल्ड स्टोरेज मे रखते हैं और मांग के अनुसार वही से सप्लाई करते हैं। पार्थीभाई बताते हैं कि इसमें बस तीन महीने कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। उसके बाद इसमें ज़्यादा काम नहीं होता। वह बचे हुआ समय पार्थीभाई अपने परिवार के साथ बिताते हैं।

पार्थीभाई अब एक कामयाब कारोबारी बन चुके हैं

जब पार्थीभाई नहीं रहते हैं तब उनका सारा काम उनके मैनेजर और स्टाफ देखते हैं। अभी उनके फार्म पर 16 से अधिक लोग काम कर रहे हैं। हर साल पार्थीभाई 3.5 करोड़ रुपए से अधिक के आलू बेचते हैं। पार्थीभाई ने यह साबित कर दिया है कि कुछ सीखने और उसमें सफल होने की कोई उम्र नहीं होती। वह अपने इस सफलता से दूसरों को भी प्रेरित करते हैं। पार्थीभाई ने अपने सपने को पूरा करने के लिए पुलिस की नौकरी तक छोड़ दी। यह फैसला कतई आसान नहीं था परंतु उनकी लगन और कड़ी मेहनत ने उनके लिए गए फैसले को सही साबित कर दिया।

पार्थीभाई जेठभाई चौधरी द्वारा की गई यह कड़ी मेहनत तारीफ के योग्य है।

News Desk

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