करतार सिंह सोंखले के बुलंद हौसलों के सामने बौना हुआ उम्र का आंकड़ा, बांस से बोतलों पर उकेर रहे आकृति: सरकार ने किया पद्मश्री का ऐलान

करतार सिंह सौंखले नादौन के नौहंगी गांव से हैं। अपने कलात्मक कार्य के लिए भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्मश्री अवार्ड के लिए चुना गया है। वह बांस का प्रयोग कर कलाकृतियां बनाते हैं। उन्होंने शीशे की बोतलों के अंदर कई कलाकृतियां बनाई हैं। शिव परिवार, राधा कृष्ण, अब्दुल कलाम और साईं बाबा सहित दुनिया के कई धरोहरों की कृतियां करतार सिंह ने शीशे की बोतलों द्वारा बनाई हैं। इन सबके अलावा बोतल के बाहर भी बांस द्वारा अद्भुत कृतियां बनाई हैं।

करतार की कहानी जानिए

करतार सिंह ने बताया कि उन्होंने अपनी कला को लॉकडाउन के दौरान और उभारने का काम किया। पैतृक गांव नादौन के गलोड़ क्षेत्र के रूटहर गांव में करतार सिंह का बचपन बीता है। वही के गलौड़ स्कूल से करतार सिंह ने अपनी हायर सेकेंडरी तक की शिक्षा हासिल की है। करतार सिंह का जन्म 1959 में हुआ था। बिलासपुर कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने डी फार्मेसी की है।

बंद बोतल में कलाकृतियां बनाना वाकई मुश्किल है क्योंकि हम अपने हाथों की एक उंगली भी नहीं घुसा सकते, मगर करतार सिंह के हुनर ने लोगों को हैरान कर दिया है। करतार सिंह बंद बोतलों में कलाकृति को उतारने में माहिर हैं।

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केंद्र सरकार द्वारा पुरस्कार की घोषणा

केंद्र सरकार ने करतार सिंह की कला को देखते हुए उन्हें पद्मश्री पुरस्कार देने का ऐलान किया है। सचमुच करतार सिंह की कला अद्वितीय है।

करतार सिंह के बचपन के शौक ने ही उन्हें इतना बड़ा सम्मान दिलाया है। करतार सिंह पद्मश्री पुरस्कार का मिलना अपनी कला की सम्मान बताते हैं।

पहले का जीवन

वर्ष 1986 में उनकी नियुक्ति एनआईटी हमीरपुर में बतौर फार्मेसिस्ट हुई थी। वही साल 1987 में उनका विवाह सुनीता देवी से हुआ, जो वर्तमान में कांगड़ा जिला के कूहना स्कूल में बतौर प्रवक्ता अपनी सेवाएं दे रही हैं। वर्ष 2019 में ही वह चीफ फार्मेसिस्ट की पद से सेवानिवृत हुए।

बचपन से रहा है लगाव

बांस की बनी वस्तुओं से करतार सिंह बचपन से ही लगाव था। वह 20 साल की उम्र से ही बांस की कलाकृतियां बना रहे हैं। करतार सिंह अपनी कलाकृतियों को बेचने के बजाय सहेज कर रखते हैं। करतार सिंह सरकार की मदद द्वारा एक म्यूजियम बनाना चाहते हैं।

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पारिवारिक सदस्यों के बारे में

करतार सिंह की पत्नी स्कूल में प्रवक्ता हैं और बेटा फिजियोथैरेपिस्ट है। उनका बेटा केतन अपने पिता को उनके कला के लिए उचित सम्मान दिलाने के लिए प्रयासरत रहते हैं। करतार सिंह युवाओं को कला सिखाना चाहते हैं। साथ ही वह अपने आने वाली पीढ़ी को अपनी कला से प्रेरित करना चाहते हैं।

अन्य सम्मान भी मिल चुके हैं

करतार सिंह को सुजानपुर में हमीर गौख का सम्मान मिला था, जिससे उत्साहित होकर वह आगे बढ़े। साल 2020 में उन्हें इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड तथा इसी वर्ष प्रतिष्ठित एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड का सम्मान उन्हें मिला। करतार सिंह को ग्रैंड मास्टर की उपाधि भी दी गई है।

News Desk

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