खेती बाड़ी

बोकारो में संताली युवक ने परती ज़मीन पर लाई हरियाली, मनरेगा से बदली अपनी जिंदगी

यदि मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तब इन्सान बंजर पड़ी ज़मीन को भी उपजाऊ बना सकता है। उन्हीं में से एक किसान लालचंद सोरेन हैं, जिन्होनें वर्षों से बंजर पड़ी भूमि पर भी हरियाली को ला दिया।

लालचंद सोरेन झारखंड (Jharakhand) के बोकारो (Bokaro) ज़िले के गोमिया प्रखंड के अंतर्गत तुलबुल पंचायत के रहने वाले हैं। उनके दो भाई शिबू सोरेन एवं वीरेन्द्र सोरेन हैं। लालचंद बहुत गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं इसलिए पैसे के अभाव में उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं सकें।

लालचंद सोरेन (Lalchand Soren) ने वर्ष 2016 में 10वीं की परीक्षा पास की, उसके बाद वर्ष 2017 में उनके पिता का निधन हो गया। पिता के निधन हो जाने के बाद इंटर की शिक्षा पूरी करने के लिये पैसे की कमी होने लगी, जिस वजह से वह आगे की पढ़ाई नहीं कर सके।

Jharkhand bokaro Santali

पढ़ाई बीच में ही छुट जाने के कारण वह काफी विचलित हो गये और अंत में खेती-बाड़ी के कार्य में जुड़ गये। उनका कहना है कि जब हाथ में ताकत है तब दूसरे प्रदेशों में रोज़गार के लिये पलायन करने से खेती-बाड़ी कर आत्मनिर्भर बनना बेहतर है।

वर्ष 2020 में सोरेन ने मनरेगा के तहत रोज़गार सेवक विशाल कुमार डे के मार्गदर्शन में एक एकड़ में आम की बागवानी कि। उन्होंने खाली पड़ी ज़मीन पर प्रखंड द्वारा मिले दिशा निर्देश के तहत आलू, प्याज और टमाटर लगाया।

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इसके अलावा लालचंद सोरेन ने दामोदर नदी के तट पर लगभग 2 एकड़ की बंजर पड़ी ज़मीन पर गेहूं की खेती की। खेती के अलावा सोरेन ने वर्ष 2017 में मछली पालन का प्रशिक्षण लिया। सुकर पालन के लिये उन्होंने केसीसी और बैंक से लोन लेने के लिये बैंक का चक्कर काटते-काटते थक गये मगर किसी ने कोई मदद नहीं कि। उसके बाद उन्होंने खुद के पास रखे कुछ पैसों और क़र्ज़ लेकर सुकर खरीदा और उसका पालन करने लगे।

कृषि कार्य में लालचंद की लगन देखकर BDO कपिल कुमार ने मनरेगा के तहत सुकर पालन के लिये एक शेड आवंटन करने की बात कही तथा कृषि विकास के लिये सहयोग करने का आश्वासन भी दिया। अंचलाधिकारी ओम प्रकाश मंडल ने संताली युवक लालचंद को आम की बागवानी के लिये भूमि सत्यापित कर बागवानी करने के लिये मनोबल बढ़ाया। इसके अलावा उन्होंने सोरेन द्वारा खेती कर के आत्मनिर्भर बनने के लिये कहा कि इससे अन्य लोगों को भी प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।

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