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Monday, November 29, 2021
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IAS Maniram Sharma ने 3 बार UPSC की परीक्षा पासकर किया पिता का नाम रौशन,कभी BDO ने कहा था ये तो चपरासी भी नहीं बन सकता

“वो जो शोर मचाते हैं भीड़ में,
भीड़ ही बनकर रह जाते हैं..
वही पाते हैं जिंदगी में कामयाबी,
जो ख़ामोशी से अपना काम कर जाते हैं..”

यह पंक्तियां आईएएस मनीराम शर्मा पर सटीक बैठती हैं। मनीराम ने काफी संघर्ष किया है और इस संघर्ष के बदौलत ही उन्होंने अपनी सफलता हासिल की। आइये जानते है उनके बारे में।

मनीराम शर्मा का परिचय

मनीराम शर्मा राजस्थान के अलवर के एक छोटे से गांव बंदीगढ़ के रहने वाले हैं। उन्होंने अपने जीवन में बहुत संघर्ष किया। पिता मजदूर, मां नेत्रहीन और स्वयं सौ प्रतिशत बहरेपन का शिकार जिला अलवर राजस्थान के बंदीगढ़ गांव के रहने वाले मनीराम शर्मा ने आईएएस में आने के लिए जो संघर्ष किया है उसकी मिसाल दी जा सकती है।
मनीराम शर्मा का आईएएस बनने का सपना वर्ष 1995 में शुरू हुआ, जिसे पूरा करने में 15 वर्ष का समय लग गया।

गांव में नही था विद्यालय

जिला अलवर राजस्थान के गांव बंदीगढ़ में स्कूल नहीं था। मनीराम शर्मा पास के गांव में पांच किलोमीटर दूर पढ़ने जाते थे। लगन ऐसी थी कि दसवीं की परीक्षा में राज्य शिक्षा बोर्ड की परीक्षा में पांचवां और बारहवीं की परीक्षा में सातवां स्थान हासिल किया।

खुद को मजबूत किया

दसवीं क्लास में शर्मा प्रदेश मेरिट में पांचवें स्थान पर आएं। उन्हें कुछ सुनाई नहीं देता था। दोस्त जाकर रिजल्ट देखकर आए, उनके घर की तरफ हाथ हिलाकर दौड़ते आए। शर्मा के पिता जी को लगा वो फेल हो गए है, वे किसी परिचित विकास अधिकारी के पास ले गए और बोले, बेटा दसवीं में पास हुआ है चपरासी लगा दो। बीडीओ ने कहा ये तो सुन ही नहीं सकता। इसे न घंटी सुनाई देगी न ही किसी की आवाज। ये कैसे चपरासी बन सकता है। उनके पिता की आंखों में आंसू छलक आए। मनीराम ने अपने पिता का हाथ पकड़ के बोले कि वो एक दिन अफसर जरूर बनेंगे।

अव्वल होते गए मनीराम

कॉलेज में प्रवेश के दूसरे वर्ष में ही मनीराम शर्मा ने राजस्थान पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षा उत्तीर्ण कर क्लर्क के तौर पर नियुक्ति पाई। यूनिवर्सिटी में टॉप किया और नेट की परीक्षा उत्तीर्ण कर लेक्चरार की नियुक्ति पाई। संघर्ष बढ़ता रहा शर्मा परीक्षाएं उत्तीर्ण कर आगे बढ़ते रहे। अंतत: उन्होंने आईएएस की परीक्षा उत्तीर्ण की और मुकाम हासिल किया।

आज वह उनलोगों के लिए प्रेरणा हैं जो अपनी परेशानियों से हार जाते हैं। अपनी परेशानियों से जो जीतता है वहीं अपना विजय पताका लहरा पाता है।

Shubham Jha
Shubham वर्तमान में पटना विश्वविद्यालय (Patna University) में स्नात्तकोत्तर के छात्र हैं। पढ़ाई के साथ-साथ शुभम अपनी लेखनी के माध्यम से दुनिया में बदलाव लाने की ख्वाहिश रखते हैं। इसके अलावे शुभम कॉलेज के गैर-शैक्षणिक क्रियाकलापों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।
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