गाय के गोबर और मूत्र से तैयार की जा रही जैविक खाद, जानिए क्या है प्रक्रिया

खेतों में जैविक खाद डालने से अच्छी फसल पैदा होती है। अन्य किसी भी खाद की तुलना में जैविक खाद फसल के लिए ज्यादा लाभदायक होता है। अब जैविक खाद बनाना बहुत ही सरल हो गया है। इस कार्य को सरल बनाया है, हापुड़ के रसूलपुर गांव के रहने वाले गुरमीत सिंह ने। उनका कहना है कि एक देसी गाय के गोबर और मूत्र से इतना जैविक खाद तैयार किया जा सकता है कि उसके जरिये 35 बीघा यानी छह एकड़ ज़मीन पर आराम से खेती की जा सकती है।

गुरमीत सिंह (Gurmeet Singh) का फार्मूला

35 वर्षीय गुरमीत सिंह अपने सरल फार्मूले से राज्य स्तरीय पुरस्कार तक पहुंच गए। वह पिछले पांच सालों से जैविक खाद से गन्ने की खेती कर रहे हैं। गन्ने के साथ-साथ वह गेहूं, धान सहित कई सब्जियों को बगैर किसी रासायनिक खाद और कीटनाशक के पैदा कर रहे हैं। गुरमीत कहते हैं कि अगर आपके पास देसी गाय के जगह नस्ल की एक गाय हो, तब उसके गोबर और गोमूत्र से 25 एकड़ तक की खेती आसानी से करना संभव है। गुरमीत के अनुसार एक एकड़ खेत के लिए 10 किलो गोबर और पांच किलो गोमूत्र पर्याप्त होता है।

Gurmeet Singh process of making organic compost from cow

कैसे बनता है जैविक खाद?

गुरमीत बताते हैं, गोबर और गोमूत्र का मिश्रण बनाने के बाद उसमें तीन किलो गुड़ और दो किलो बेसन मिलाकर, बरगद के पेड़ के नीचे की दो किलो मिट्टी डालकर, उसमें 200 लीटर पानी मिलाया जाता है। जैविक खाद तैयार होने में सर्दियों में 30 से 40 दिन तो वही गर्मी में करीब 15 दिन लगते हैं। खाद तैयार होने के बाद सिंचाई के लिए पानी की नाली में ही खाद के मिश्रण को धीरे-धीरे छोड़ दिया जाता। इसके अलावा फसलों को कीड़ों से बचाने के लिए उन पर नीम, भांग का छिड़काव किया जाता है।

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गोवंश के संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा

गुरमीत कहते हैं कि रसायनिक खाद के बहुत से नुकसान हैं। इसके इस्तेमाल से सेहत पर बहुत बुरा असर पड़ता है। हम अगर इसका इस्तेमाल करना छोड़ दें, तब इससे हमारी सेहत में बहुत सुधार होगा। साथ ही गोवंश के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। गुरमीत कहते हैं कि दूध ना देने वाली गाय को लोग अपने घरों में नहीं रखना चाहते। उन्हें बेसहारा छोड़ देते हैं। उन्हें यह गलत लगता है और इसे खतम करने के लिए उन्होंने यह तरकीब निकाली। वह कहते हैं कि यदि किसान गाय के गोबर और गोमूत्र को एकत्र करके बेचें, तब भी अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।

Gurmeet Singh process of making organic compost from cow

जैविक खाद सेहत के लिए है लाभदायक

गुरमीत की इस कला को जानने के लिए आस-पास के गाँव के किसान उनके पास आते हैं। किसान सुखवीर बताते हैं कि गुरमीत असल तरीके से खेती करते हैं। वह जिस प्रकार जैविक खाद के इस्तेमाल से खेती करते हैं, उससे ज़मीन की उपजाऊ क्षमता बढ़ती हैं। साथ ही उससे उगने वाली फसल भी सेहत के लिए अच्छी होती है। पास के किसान सुरेंद्र कुमार कहते हैं कि जैविक खाद के इस्तेमाल से रासायनिक खाद का खर्च बचता है। इससे किसानों को अधिक मुनाफा होता है।

गुरमीत सिंह हुए हैं चयनित

खांडसारी के निरीक्षक रविंद्र कुमार सिंह बताते हैं कि लखनऊ में 27 फरवरी को राज्य स्तरीय दो दिवसीय गुड़ महोत्सव का आयोजन होने वाला है। इस महोत्सव में शामिल होने के लिए ज़िले की एकमात्र खांडसारी इकाई का चयन किया गया, जिसके संचालक गुरमीत सिंह हैं। रविंद्र कहते हैं कि यह पहला मौका है, जब जनपद से किसी गुड़ उत्पादक का नाम राज्य स्तरीय महोत्सव के लिए चुना गया है। यह उनके लिए बहुत ही गर्व की बात है।

News Desk

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