पांचवी पास महिला ने अच्छे अच्छों को फेल किया, दूध का कारोबार शुरू कर आज 56 हज़ार लीटर दूध बेचती हैं

ज्यादातर लोगों का मानना है कि कामयाबी हासिल करने के लिये बड़ी-बड़ी डिग्रीयों की आवश्यकता होती है लेकिन ऐसा नहीं है जीवन में कामयाब होने के लिये लगन और मेहनत की जरुरत होती है। यदि आपके पास बड़ी बड़ी डिग्रियां नहीं है, और जुनून है तो सफलता प्राप्त किया जा सकता है। समाज में कुछ ऐसे कई लोग हैं जो डिग्री नहीं होने के बाद भी अपनी मेहनत और निष्ठा से सफलता की कहानियां लिख रहे हैं।

इस कहानी के माध्यम से हम एक ऐसी महिला के बारे मे बता रहे हैं जो महज़ 5वीं पास है। इस महिला ने सिर्फ एक गाय और एक भैंस से डेयरी उद्योग आरंभ किया और आज 56 लीटर दूध का कारोबार करती है।

cow farming

इस महिला का नाम है, बिटना देवी जो निगोहां के मिरकनगर गांव से ताल्लुक रखती हैं। उन्होंने 5वीं कक्षा तक ही शिक्षा ग्रहण किया है। 15 वर्ष की उम्र उनकी शादी हो गई थी। शादी में उनके पिता ने भेंट के रूप में एक गाय और एक भैंस दिया था। बिटना देवी के लिये अपने पिता द्वारा दिये भेंट ही कमाई का एकमात्र माध्यम था। वह अपने गाय और बछ्ड़ो को बच्चों के जैसा प्यार देती थी। गरीब और कम पढ़ी लिखी वही बिटना देवी आज एक सफल डेयरी फर्म की मालिक हैं।

अक्सर लोग ग्रामीण महिलाओं को असहाय समझते है लेकिन सिर्फ 5वीं पास बिटना देवी ने इस बात को गलत सिद्ध कर दिया है और एक प्रेरणा बनकर अन्य ग्रामीण महिलाओं को नई राह दिखाई है।

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बिटना देवी ने मायके से मिली गाय और भैंस का दूध बेचने का कार्य आरंभ किया। उन्होंने बताया कि शादी के समय वह अपने मायके से एक गाय और एक भैंस लेकर आई थी, यहीं से उन्हें नई राह मिली। उन्होंने दूध की बिक्री कर के एक गाय खरीदी, एक सीमित संसाधन के बीच ही दुध बेचकर उससे होने वाली कमाई से वे दुधारू मवेशियों की संख्या लगातार बढाती गईं।

वर्ष 1996 में उन्होनें दूध उत्पादन का कार्य आरंभ किया था जिसके बाद धीरे-धीरे बिटना देवी ने इस व्यवसाय को एक बड़ा रूप दिया। वर्ष 2005 से लगातार 10 बार उन्होनें सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन के लिये गोकुल पुरस्कार अपने नाम किया है। बिटना देवी अपने घर-परिवार की आजीविका अपनी आमदनी से ही चलाती हैं। बिटना देवी से प्रेरणा लेकर दूसरी महिलाओं ने भी दूध उत्पादन का कार्य आरंभ किया।

Bitna devi got award

अभी बिटना देवी के पास 40 दुधारू मवेशी है। वह प्रतिदिन सुबह 5 बजे उठकर मवेशियों को चारा-पानी देती हैं। उसके बाद स्वयं ही दुध निकालती और खुद ही दुध को डेयरी तक पहुंचाती हैं।

बिटना देवी ने वर्ष 2014-15 मे कुल 56,567 लीटर दूध का उत्पादन किया था। उसके बाद धीरे-धीरे उन्होंने इसे व्यापार का रूप दिया, जिससे वे प्रतिदिन पराग डेयरी को लगभग 155 लीटर दूध सप्लाई करती हैं। बिटना देवी की कोशिशों को ध्यान में रखते हुये उत्तरप्रदेश सरकार ने उन्हें गोकुल पुरस्कार से सम्मानित किया। बिटना देवी ने बताया कि वह औपचारिक रूप से इस कार्य की शुरुआत साल 1985 में की थीं।

लाखों का व्यवसाय करने वाली बिटना देवी को आरंभ में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था, लेकिन उन्होंने हार न मानकर अपने कठिन परिश्रम से किस्मत को बदल दिया। वह सभी महिलाओं के लिये प्रेरणा की नई मिसाल हैं।

News Desk

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