दुलारी देवी: कभी करतीं थीं झाड़ू पोछा मगर मधुबनी पेंटिंग ने दिलाया पद्म सम्मान, अब लक्ष्य लड़कियों को भी आत्मनिर्भर बनना

अपनी कला का प्रदर्शन करके हर क्षेत्र में परचम लहराना हमारे देश की महिलाएं बखूबी जानती हैं। आज हम आपके समक्ष एक ऐसी महिला की कहानी लेकर आएं हैं, जो कभी लोगों के घरों में साफ-सफाई का काम कर आजीविका चलाया करती थीं मगर आज अपने हुनर से सबके दिलों पर राज कर रही हैं।

यह महिला हैं पद्म पुरस्कार से सम्मानित, दुलारी देवी। जिन्होंने 8 हज़ार पेंटिंग्स बनाई हैं।

Dulari Devi painter

दुलारी बनी सबकी ‘दुलारी’

53 वर्षीय दुलारी देवी (Dulari Devi) बिहार (Bihar) राज्य के मधुबनी (Madhubani) ज़िले के एक गांव रांटी (Ranti) से नाता रखती हैं। यह मल्लाह जाति से आती हैं। दुलारी ने विभिन्न विषयों पर लगभग 8000 हज़ार पेंटिंग्स बनाई हैं। 25 जनवरी की शाम, जब दुलारी का चयन पद्मश्री पुरस्कार के लिए हुआ, तब वह हर्षोउल्लास से भर उठीं। उनके इस सम्मान से सिर्फ दुलारी ही नहीं बल्कि गांव के सभी व्यक्ति भी बहुत खुश हैं। उन्होंने इस सम्मान के लिए बहुत संघर्ष किया है।

मात्र 12 वर्ष की आयु में हुई शादी

दुलारी ने यह जानकारी दी कि उनकी शादी मात्र 12 वर्ष की आयु में ही हो गई थी। हालांकि शादी ज्यादा दिनों तक नहीं टिक पाई। वह अपने ससुराल में 2 वर्षों तक ही रह सकीं और शादी टूट जाने के बाद अपने मायके आ गईं। यहां उनके घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उन्हें लोगों के घरों में झाड़ू-पोछा करना पड़ा। दुलारी अपनी मां के साथ प्रसिद्ध मिथिला पेंटिंग कलाकार “कर्पूरी देवी और “मंसूरी देवी” के घर सफाई का काम करने लगीं।

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सफाई के दौरान कलाकारों की पेंटिंग देख सीखा खुद पेंटिंग करना

दुलारी सफाई करतीं और कलाकारों की पेंटिंग को भी बहुत ध्यान से देखतीं। पेंटिंग्स देखते-देखते दुलारी के मन में भी पेंटिंग करने की इच्छा हुई और वह भी पेंटिंग करने लगीं। प्रारंभिक दौर में वह अपने घर के आंगन की दीवार पर मिट्टी के द्वारा पेंटिंग किया करती थीं। धीरे-धीरे उन्होंने लकड़ी द्वारा कुची का निर्माण किया फिर उस पर भी पेंटिंग करने लगीं। धीरे-धीरे वह कपड़ों और कागज़ पर भी पेंटिंग कर अपने हुनर को प्रदर्शित करने लगीं। उनकी पेंटिंग की लोगों ने प्रशंसा की। उनका मनोबल कर्पूरी देवी ने बढ़ाया तब उन्होंने पेंटिंग के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई।

Dulari Devi get Padma Samman

बड़ी-बड़ी हस्तियों से मिली सराहना

उनके कला की तारीफ करने वालों में नेता, अभिनेता, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और वैज्ञानिक तथा राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम आज़ाद भी शामिल रह चुके हैं। अब दुलारी का लक्ष्य अपने गांव की सभी लड़कियों को इस कला को सिखाना है, जिससे लड़कियों को पहचान मिल सके ताकि और लड़कियों की जिंदगी बेहतर हो सके।

विश्व प्रसिद्ध है दुलारी की पेंटिंग

शिक्षा के तौर पर दुलारी सिर्फ अपना नाम लिखना ही जानती हैं, लेकिन उनकी कला पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। उनकी पेंटिंग इग्नू के माध्यम से निर्मित मैथिली भाषा के पाठ्यक्रमों के मेन पेज़ पर छपी हुई है। इसके साथ ही उनकी पेंटिंग, गीता वुल्फ की “फॉलोइंग माइ पेंट ब्रश” के अतिरिक्त “मार्टिन ली कॉज” की फ्रेंच में लिखी पुस्तकों को शोभायमान बना रही हैं। दुलारी ने संघर्ष में जीवन व्यतीत कर अपने हुनर से पहचान बनाई है।

News Desk

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