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Friday, June 24, 2022
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वोल्ट्रोन ई-साईकिल को एक बार करिये चार्ज और 100 किमी घूमिये नॉनस्टॉप

भारत में स्टार्टअप कंपनियों की सफलता की कहानी का दौर चल रहै है। कहते हैं जब एक रास्ता बंद हो जाता है तो दूसरा खुद ही कुल जाता है। ऐसे में जरुरत है कि हम अपने आप को सजग रखें। क्योंकि जब आप मुश्किल घड़ी में अपनी हिम्मत को बांध के रखेंगे तो एक दिन आपको सफलता जरुर मिलेगी। ऐसी ही स्टार्टअप की एक कहानी प्रशांता की भी है। कोरोना काल में लॉकडाउन के कारण कई कंपनियों को घाटा हुआ। इसमें  वोल्ट्रो मोटर्स के सीईओ प्रशांता भी शामिल हैं। प्रशांता 2020 में हार्ले डेविडसन के तर्ज पर बनी इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल के प्रोटोटाइप संस्करम को लॉन्च करने वाले थे। लेकिन लॉकडाउन की वजह से इन मोटरसाइकिलों के निर्माण के लिए आधिकारिक स्वीकृति लेना मुश्किल हो गया था जिसके कारम इस योजना को रोकना पडा।

प्रशांता ने इससे हार नहीं मानी और उन्होने इसकी जगह कोई और आइडिया ढूंढ़ निकाला। उनके नए आइडिया नें किसी भी तरह की आदिकारिक स्वीकृति की जरुरत नहीं पड़ी। इस नए आइडिया का नाम है वोल्ट्रोन ई मोटरसाइकिल।

वोल्ट्रोन ई-साईकिल क्या है

बाजार में आपको ये बाइक मात्र 35 हजार रुपए की मिल जाएगी। इस मोटरसाइकिल में 100 किमी बैटरी रेंज है यानि एक बार चार्ज करने पर ये बाइक 100 किमी तक चल सकता है। इसके साथ ही इस बाइक से उबड़-खाबड़ सड़को, पहाड़ी इलाकों पर भी सवारी की जा सकती है। इस बाइक की एक और खास बात है कि इसमें आपको एक और सीट भी मिलेगी। इसका मतलब आप अपने पार्टनर के साथ इस साइकिल पर आराम से चला सकते हो।

ई-साईकिल बनाने से पहले किया सर्वेक्षण

एक साक्षात्कार में प्रशांता बताते हैं कि उन्होने ई-साईकिल बनाने से पहले बाजार का सर्वेक्षण किया। उन्होनें ये जानने की कोशिश की आखिर पर्यावरण के अनुकूल और किफायती होने के बावजूद भी इनकी डिमांड कम क्यों हैं। इस सर्वेक्षण में उन्हे पता चला कि अधिकांश ई-साइकिल में रेंज की कमी होती है। बाजार में अधिकांश ई-साईकिल की रेंज 25 से 35 किमी की बैटरी रेंज है। जिससे ग्राहको के मन एक संकोच और चिंता की भावना पैदा हो जाती थी। प्रशांत ने इस बात का ध्यान रखते हुए अपने साईकिल की रेंज को 100 किमी तक बढ़ाया।

वोल्ट्रो मोटर्स की टीम ने मणिपुर की पहाड़ियों में ई-साइकिल का परिक्षण किया। इस परिक्षण में उन्होने इस साईकिल  से देहरादून से मसूरी जाने और वापस आने की यात्रा कराई। प्रशांता ने आगे कहा कि लद्दाख में तीव्र ढलान होती है और इन सड़को पर साईकिल की कार्यक्षमता को लेकर वो निश्चित नहीं हैं। हालांकि नैनीताल, मसूरी और अन्य स्थान पर नियमित रुप से हिल- राइडिंग के लिए ये सुरक्षित है।

ई-साईकिल के फायदे

इन साइकिलों के इस्तेमाल से प्रदूषण में काफी कमी देखने को मिलेगी। आपको बता दें कि अगर आप किसी बाइक से 100 किमी रास्ता तय करते है तो आपको 240 रुपए खर्च होते हैं। वहीं वोस्ट्रोन इलेक्ट्रिक साइकिल से इस यात्रा को सिर्फ चार रुपए में तय किया जा सकता है। इस साइकिल को दिल्ली के सड़कों पर भी परिक्षण किया जा चुका है। प्रशांता ने बताया कि उन्होने सेना के अनुरोध पर इस साइकिल में रिवर्स बीप नामक एक और विशेषता जोड़ी है। जिसमें एलईडी के इस्तेमाल से बैटरी के उपयोग को दिखाया जाता है। इसका मतलब ये है कि जैसे-जैसे बैटरी खत्म होगी एलईडी लाइट बंद होते जाएंगे। प्रशांता ने दावा किया कि भारतीय सेना अपने हरित पहल हिस्से के रुप में ई-साइकिलों को सामिल करना चाह रही हैं। सेना के ऑफिस में फाइलों को एक ऑफिस से दूसरे ऑफिस में पहुंचाने के साथ कई तरह के काम में इस्तेमाल किया जाएगा।

प्रशांता आगे बताते हैं कि इस साईकिल में ऑटो ई-ब्रेक कट ऑफ सिस्टम है। इससे जब आप ब्रेक लेते हैं तो यह फीचर मोटर को बंद कर देता है और साइकिल चालक को गिरने से बचाता है। इस फीचर से साइकिल को रात में चलाने में मदद मिलती है।

Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।
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