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Saturday, June 25, 2022
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जिन्‍हें कभी डायन बताकर ग्रामीणों ने खिला दिया था मैला, अब मिला बड़ा सम्‍मान, सच में ‘शेरनी’ हैं छुटनी देवी

अगर कुछ करने की चाह हो तो आपको आगे बढ़ने से कोई नही रोक सकता। आज हम आपको एक ऐसी ही महिला के बारे में बताएंगे जिन्होंने अपने बलबूते पर अपनी पहचान कायम की।

हम बात कर रहे हैं झारखंड की रहने वाली श्रीमती छुटनी देवी जी का। जिन्होंने समाज के तानों को अपनी मेहनत से आशीर्वाद बना लिया। छुटनी देवी को कभी समाज ने डायन कहकर प्रताड़ित किया था। उन्हें घर एवं समाज से बाहर तक कर दिया गया था। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने समाज में फैली कुरीतियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की।

संघर्ष में बीता जीवन

झारखंड सरायकेला-खरसावां जिले के बीरबांस गांव की रहने वाली छुटनी देवी जी को 25 साल पहले डायन बताते हुए प्रताड़ित कर गांव से निकाल दिया गया था। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आज अंधविश्वास और इस कुप्रथा के खिलाफ लोगों को जागरुक करने का काम रही हैं। श्रीमती छुटनी देवी की शादी 12 वर्ष की उम्र में ही महताइनडीह के धनंजय महतो से हो गई थी।

डायन कहकर पुकारा

किसी कारण से छुटनी को गांव वालों के द्वारा बाहर निकाले जाने के बाद वो अपने परिवार के साथ गांव के बाहर झोंपड़ी बनाकर रहने लगी। इसी बीच लोगों के कहने पर उनकी बेटी ने भी उन्हें डायन कह दिया। गांव के लोग श्रीमती छुटनी देवी जी को अनायास ही डायन कहने लगे। आस-पड़ोस में घटने वाली घटनाओं का दोष श्रीमती छुटनी देवी पर ही मढ़ दिया जाता था। लोगों ने उन्हें मल-मूत्र तक पीने को विवश किया। श्रीमती छुटनी देवी को पेड़ से बांधकर पीटा गया और उन्हें निरवस्त्र कर गांव से निकाल दिया गया।

नई दिशा की ओर चल पड़ी

हर जगह से निराश श्रीमती छुटनी देवी किसी तरह मायके झाबुआकोचा आ गईं। यहां कुछ महीने रहने के बाद वो गैर सरकारी संस्था ‘आशा’ के संपर्क में गईं। जिसके बाद वो अपने साथ हुए जुर्म के खिलाफ आवाज उठाने लगी। गांव में और किसी महिला के साथ ऐसा अत्याचार ना हो इसलिए श्रीमती छुटनी देवी गांव-गांव जाकर लोगों को जागरुक करने लगी। श्रीमती छुटनी देवी प्रताड़ित महिलाओं की सहायता करना ही अपना धर्म मानती हैं। वो कहती हैं कि ‘यही उनका काम है।‘ श्रीमती छुटनी देवी इस कुप्रथा के खिलाफ अभियान चलाने के साथ अपने निजी खर्च से रोजाना 15-20 गरीब पीड़ित महिलाओं भोजन भी उपलब्ध कराती हैं।

पद्मश्री सम्मान से सम्मानित

श्रीमती छुटनी देवी जी के कार्य को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान में से एक पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया है। 62 साल की श्रीमती छुटनी देवी के नाम के आगे अब भारत का श्रेष्ठ सम्मान पद्मश्री जुड़ गया है। श्रीमती छुटनी देवी को पद्मश्री जैसा बड़ा सम्मान मिलने वाला है लेकिन श्रीमती छुटनी देवी को पद्मश्री के बारे में कुछ पता नहीं था। जब उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से फोन आया और बोला गया कि आपको पद्मश्री मिलेगा तो श्रीमती छुटनी देवी ने कहा कि अभी टाइम नहीं है, एक घंटे बाद फोन करना। श्रीमती छुटनी को फिर दोबारा से फोन आया। तब लोगों ने उन्हें बाताया कि यह एक बड़ा सम्मान है। आपका नाम और फोटो सभी अखबार और टीवी में आएगा।

कभी डायन बताकर गांव से निकाली गई श्रीमती छुटनी देवी आज इस कुप्रथा की शिकार महिलाओं के लिए मसीहा बन चुकी हैं।

Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।
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