16 वर्ष की उम्र में खोई सुनने की शक्ति मगर नहीं खोई हिम्मत, 23 वर्ष की उम्र में बनीं आईएएस: सौम्या शर्मा

यूपीएससी भारत के तमाम परीक्षाओं में सबसे कठिन मानी जाती है। इस परीक्षा में अगर कोई पहले प्रयास में ही सफल हो जाए तो वह व्यक्ति सराहना के योग्य माना जाता है। आज हम एक ऐसी ही लड़की की बात करेंगे, जिसने अपने पहले प्रयास में ही ना सिर्फ़ यूपीएससी में सफलता प्राप्त किया बल्कि वह नौंवी रैंक के साथ ऑल इंडिया टॉपर भी बनीं। जिससे उन्हें आईएएस पद नियुक्त हुआ।

सौम्या शर्मा (Saumya Sharma) की कहानी

दिल्ली (Delhi) की रहने वाली सौम्या का यूपीएससी का सफर जितना जल्दी खतम हुआ, वह उतना ही चुनौतीपूर्ण और संघर्ष भरा हुआ भी था। सौम्या की सबसे खास बात यह है कि वह कभी भाग्य का रोना नहीं रोती। उनका मनना है कि किसी भी हालात में निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए। आज हम सौम्या शर्मा के संघर्ष के बारे में बात करेंगे।

9th rank in UPSC exam

अचानक सौम्या की सुनने की शक्ति चली गयी

16 साल की उम्र में अचानक सौम्या की सुनने की शक्ति चली गयी। यह पता ही नहीं चला की ऐसा क्यों हुआ? इस बात से सौम्या सदमे में चली गईं मगर कुछ समय बाद उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया और खुद को समझाया कि अब यही उनका सच है। इस घटना के बाद से ही सौम्या हियरिंग ऐड की सहायता से सुनने लगीं। सौम्या शुरू से ही पढ़ने में बहुत अच्छी थीं। शुरुआती पढ़ाई करने के बाद सौम्या दिल्ली के नेशनल लॉ स्कूल में आगे की पढाई की। लॉ के अंतिम वर्ष में ही सौम्या यूपीएससी परीक्षा में बैठने का फैसला कर चुकी थीं।

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यूपीएससी की तैयारी कैसे करनी चाहिए?

सौम्या कहती हैं कि ध्यान से किताबें चुननी चाहिए। एक ही टॉपिक के ज़्यादा किताब ना लें परंतु जो किताब आप चुन चुके हैं, उसे अच्छे से तैयार करें। इसके अलावा सौम्या नोट्स को बहुत अहमियत देती हैं। उनका मानना है कि नोट्स से आप परीक्षा के समय में बहुत कम टाइम में अच्छे से संशोधन कर पाते हैं। पढ़ने के साथ-साथ आंसर राइटिंग की प्रैक्टिस करना भी बहुत जरूरी है। इससे परीक्षा के समय में आप अपना आंसर समय रहते पूरा कर सकते हैं।

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सौम्या ने मेन्स की परीक्षा फीवर में दिया

सौम्या को बचपन से पेपर पढ़ने का काफी शौक था, जो उन्हें यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी के दौरान बहुत काम में आया। उन्होंने यूपीएससी परीक्षा के लिए कोचिंग नहीं ली मगर टेस्ट सीरीज़ ज्वॉइन किया। उन्होंने प्री, मेन्स और इंटरव्यू तीनों के लिए मॉक टेस्ट दिए थे। मेन्स परीक्षा के दिनों में सौम्या को कभी 102 तो कभी 103 बुखार रहता था। सौम्या को एक दिन में तीन-तीन बार सलाइन ड्रिप चढ़ायी जाती थी। आपको बता दें कि सौम्या के माता-पिता दोनों डॉक्टर हैं इसलिए सौम्या का यह कठिन समय आसानी से कट गया। परीक्षा के बीच में जब लंच ब्रेक होता था, उसमें भी सौम्या को ड्रिप लगती थी। इस प्रकार हाई फीवर के बीच सौम्या ने मेन्स की परीक्षा पूरी की।

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सौम्या यूपीएससी में सफलता प्राप्त करने की तरकीब बताती हैं

सौम्या यूपीएससी के अन्य कैंडिडेट्स को यही सलाह देती हैं कि जितना ध्यान आप पढ़ने पर दें उतना ही लिखने पर भी देना चाहिए। इसके लिए आप किसी टॉपर्स की स्ट्रेटजी ध्यान से सुने और उसे फॉलो करें। इससे आपको सही राह मिलेगी। सौम्या बताती हैं कि एस्से (लेख) के पेपर को इग्नोर ना करें क्योंकि यही आपकी रैंक बनाता है। सौम्या का मानना है कि समस्याएं सभी के जीवन में होती हैं परंतु उससे हार मानने के बजाए उसका सामना करना चाहिए। अंत में सौम्या यूपीएससी के लिए यही कहती हैं कि कड़ी मेहनत और धैर्य से यूपीएससी की परीक्षा में सफलता प्राप्त किया जा सकता है।

सौम्या शर्मा की हिम्मत की प्रसंशा करते हुए हम उनकी सफलता के लिए उन्हें बधाई देते हैं।

News Desk

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