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Thursday, June 1, 2023
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Arjun Tendulkar Biography

Arjun Tendulkar

Arjun Tendulkar
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सफलता का एक मात्र मूल मंत्र मेहनत

आज हम एक ऐसे व्यक्ति की बात करेंगे जिसके जीवन में किसी भी वस्तु , किसी भी ऐशो आराम,की कमी नही थी फिर भी अपने लक्ष्य को पाने के लिए कड़ी मेहनत की और खुद को अपने लक्ष्य की आग में झोक दिया |

वह व्यक्ति है अर्जुन तेंदुलकर। इनके जीवन में किसी ऐशो आराम,धन से परिपूर्ण आलीशान घर,लक्जरी कारो से परिपूर्ण जीवन है और इनके पिता जी इस सदी के महान खिलाड़ी की लिस्ट में No 1 पर स्थिति है क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले महान खिलाड़ी श्री सचिन रमेश तेंदुलकर है जिन्होंने भारतीय टीम को एक नए मुकाम पर पहुंचाया है सचिन तेंदुलकर के पुत्र अर्जुन तेंदुलकर को किस बात की कमी होगी आप सभी खुद ही सोच लीजिए। फिर भी अपने जीवन के उद्देश को पूरा करने के लिए उन्हे मेहनत करनी पड़ी।

Arjun Tendulkar के जीवन परिचय

आज जिनकी बात हम करेगे वे है अर्जुन तेंदुलकर इनका जन्म 24 सितंबर 1999 को महाराष्ट्र में हुआ था इनके पिता जी सचिन तेंदुलकर माता का नाम अंजली तेंदुलकर,बहन का नाम सारा तेंदुलकर है। इनके पिता जी इंडियन टीम के महान खिलाड़ी राइट हैंड बालेबाज है इनको क्रिकेट का भगवान कहा जाता है !

माता बालरोग विशेषज्ञ है बहन इनसे 2 साल बड़ी है , इनकी स्कूली शिक्षा धीरू भाई अंबानी इंटरनेशनल स्कूल से हुई है। यह स्कूल मीडिया से दूर रहता है ताकि बच्चे अपने जीवन में पढ़ाई मन से कर सके सोशल मीडिया से दूर रहे ।

Arjun Tendulkar
Arjun Tendulkar

Arjun Tendulkar का व्यक्तित्व

अर्जुन बचपन से ही अपने पिता जी की तरह बड़े क्रिकेटर बनना चाहते थे उनके पिता भी यही चाहते थे की उनका बेटा अपने जीवन में सफल हो सके , अर्जुन क्रिकेटर बनने के लिए प्रातः काल 5 बजे उठ जाते थे और सटेडिया में चले जाते थे अर्जुन लेफ्ट हैंड मीडियम फास्ट बोलर है ।

Arjun Tendulkar की शिक्षा
अर्जुन तेंदुलकर ने मुम्बई के धीरुभाई अम्बानी इंटरनेशनल स्कूल से शिक्षा ग्रहण की है. ज्यादातर इस स्कूल में अमीर लोगों के बच्चे ही पढ़ते है. स्कूल, बच्चों को लाइम लाइट से बचाने के लिए और उनकी निजता को बनाये रखने के लिए मीडिया से दुरी भी बनाकर रखता है, जिससे बच्चे अपना ध्यान पढाई में लगा सके.

Arjun Tendulkar के करियर का चुनाव

अर्जुन तेंदुलकर का जन्म मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में हुआ था. उनके पिता सचिन प्रसिद्ध खेल व्यक्तित्व होने के बावजूद भी कभी भी उन्होने अपने बेटे के करियर चयन में दबाव नहीं बनाया, बल्कि उन्होंने उन्हें अपने करियर को चुनने कि पुरी आजादी दी, लेकिन क्रिकेट अर्जुन के खून में है इसलिए उन्होंने क्रिकेट को ही अपना करियर चुना.

क्रिकेट को अपना करियर चुनने के बाद अर्जुन अपने पिता के साथ मुम्बई में क्रिकेट का अभ्यास करते है. अर्जुन के परिवार वाले उन्हें हमेशा प्रोत्साहित करते है. अर्जुन भारत के कई क्रिकेट क्लब संघ के सदस्य भी हैं. वह विभिन्न क्लबों और टूर्नामेंट के साथ स्थानीय रूप से खेलने का अवसर कभी भी नहीं गवाते है वह क्रिकेट के लिए सर्वश्रेष्ठ कोचों से ट्रेनिंग भी प्राप्त कर रहे है.



Pravin Tambe (प्रवीन ताम्बे) – Kaun Pravin Tambe

RCB vs KKR Today Lineup

Arjun Tendulkar के करियर की शुरुआत

अर्जुन जब 8 साल के थे तब से ही उनके पिता सचिन ने उन्हें क्रिकेट कोचिंग क्लब में डाल दिया और उस कोचिंग क्लब का आयोजन किया था. अर्जुन तेंदुलकर ने 22 जनवरी 2010 को पुणे में अंडर 13 टूर्नामेंट में अपना पहला मैच खेला था !

अर्जुन ने जनवरी 2011 में अपना पहला राष्ट्रीय स्तर का खेल पुणे में केडेन्स ट्राफी टूर्नामेंट को खेला था. नवम्बर 2011 में उन्होंने जमनाबाई नरसी स्कूल के खिलाफ धीरूभाई इंटरनेशनल स्कूल के लिए अपनी बढ़िया गेंदबाजी का परिचय देते हुए 22 रन देकर 8 विकेट लिया था और नरसी स्कूल को हराकर जीत हासिल की थी, वह अपने स्कूल टीम के कप्तान है !

जून 2012 में गोरेगांव सेंटर के खिलाफ क्रॉस मैदान में अंडर- 14 मैच में खर जिमखाना के लिए खेलते हुए उन्होंने अपनी क्षमता का प्रदर्शन करते हुए अपना पहला शतक लगाया था, और उन्हें मुम्बई क्रिकेट एसोसियेशन द्वारा घोषित संभावित अंडर 14 में ऑफ़ सीजन ट्रेनिंग कैम्प के लिए चुना गया था.

2014 में उन्हें बीसीसीआई टूर्नामेंट अंडर -14 मैच में पश्चिमी जोन लीग मैच मुम्बई में खेलने के लिए चुना गया था. इस मैच में मुम्बई की टीम ने गुजरात की टीम पर जीत हासिल की थी, इस मैच में अर्जुन ने एक विकेट लिया था और 36 रन बनाये थे. 24 जनवरी 2014 को ही वो मुम्बई अंडर 14 में खेलने की अपनी आयु सीमा को पूरा किये थे.

अर्जुन तेंदुलकर को IPL की मुंबई इंडियन से खरीदा है अर्जुन ने अपने पहले मैच में भुनेश्वर कुमार का विकेट लिया था !


*कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोस्त्वकर्मणि*
अर्थ – गीता के इस श्लोक में फलरहित कर्म की प्रधानता पर बल दिया गया है. यदि आप सफलता चाहते हैं तो कर्म पर ध्यान दें, तभी आप अपनी पूरी शक्ति से बिना भटकाव के कर्म को पूर्ण कर पाएंगे !



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