खेती बाड़ी

IIT-IIM से पढ़ाई पूरी कर छोड़ी करोड़ों की नौकरी, अब गांव में कर रहे गौ पालन

अक्सर युवा अच्छी नौकरी की तलाश में अपने घरों से दूर शहर की ओर पलायन कर रहे हैं, तो वहीं कुछ ऐसे भी व्यक्ति हैं, जो बड़ी-बड़ी डिग्रियां प्राप्त करने के बाद अच्छी नौकरी छोड़ गांव की उन्नति के लिए गांव में जाकर कार्य कर रहे हैं। इससे पलायन करने वाले युवाओं को अपने गांव में ही रोज़गार मिल जाएगा। इस तरह देश का हर गांव उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। आज हम जिस व्यक्ति की बात करेंगे वह भी इनमें से एक हैं। अच्छी डिग्रियां प्राप्त करने के बाद उन्होंने शहर में नौकरी करने के बजाए अपने गांव की तरक्की के बारे में सोचा और अपने कामों से गांव का नक्शा ही बदल दिया।

विज्ञान गाडोडिया (Vigyaan Gaadodiya)

विज्ञान गाडोडिया ने भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान (IIT) और भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) जैसे देश के सर्वश्रेष्ठ शैक्षणिक संस्थान से अपनी पढ़ाई पूरी की है। उसके बाद उन्होंने यसबैंक में वायस प्रेसिडेंट के पद पर नौकरी की। साल 2005 में विज्ञान यस बैंक के माइक्रो फाइनेंस के प्रमुख के तौर पर भारत के ग्रामीण इलाकों में काम करने गए थे। तब ही उन्होंने एक रिसर्च में पाया कि ग्रामीणों को गरीबी से बाहर निकाल पाने में माइक्रोफाइनेंसिंग ज़्यादा मदद नहीं कर रहा था।

After leaving job offers from IIT IIM this boy is doing dairy products business

नौकरी छोड़ किया गांव का रुख

विज्ञान ने उनकी समस्या को समझा और उसे दूर करने के लिए अपने करोड़ों की नौकरी छोड़ गरीबों की मदद करने का फैसला किया। उसके तहत उन्होंने जुलाई 2006 में अपनी नौकरी छोड़ गांव चले गए। साल 2006 से 2011 तक सतही तौर पर विज्ञान ने वर्मीन कंपोस्ट बनाने, जैविक खेती करने और एक ग्रामीण एनजीओ के लिए बीपीओ स्थापित करने में सफल रहे। इसके साथ ही उन्होंने गांव में गाय के दूध की अव्यवस्थित वितरण प्रणाली में एक कारोबारी में एक उम्मीद देखी।

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विज्ञान ने शुरू किया कारोबार

साल 2012 में विज्ञान ने (Jaipur) जयपुर से 70 किलोमीटर दूर लिसारिया गांव में तकरीबन पौने दो एकड़ में एक डेयरी उद्योग की शुरूआत की। उन्होंने इस कारोबार का नाम “सहज एग्रोफार्म” रखा है। वह इस कारोबार की शुरूआत बस लोगों को शुद्ध और ताज़ा दूध उपलब्ध कराने के लिए किया था। विज्ञान बताते हैं कि गायों को प्रोत्साहन देने पर बेहतर, स्वास्थ्यवर्धक और भैंस की तुलना में ज़्यादा पौष्टिक दूध भी मिलता है, जो एक बेहतर संसाधन साबित कर सकता है।

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विज्ञान कर रहे हैं अन्य किसानों को प्रोत्साहित

विज्ञान ने कुछ गायों के साथ शुरूआत कर आज 150 से ज़्यादा मवेशियों का दूध जयपुर के तकरीबन 250 से ज़्यादा घरों तक पहुंचाने का काम रहे हैं। विज्ञान ने एक सफल डेयरी फार्म का निर्माण किया और साथ ही अपनी सफलता का उदाहरण देते हुए अपने आस-पास के 25 गांव के किसानों को गौ पालन करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। उनके यहां करीब 500 लीटर दूध का उत्पादन होता है। अब विज्ञान अपने फार्म में दूध स्थापित कर लेने के बाद आसपास के किसानों से भी दूध इकठ्ठा करना शुरू कर दिया है।

विज्ञान ने अपने कामों से एक मिसाल पेश किया

विज्ञान ने अपने खुद का दूध का ब्रांड बनाया है। अब वह अपने उत्पादन को देश के अन्य शहरों में भी भेजते हैं। प्रौद्योगिकी का सही इस्तेमाल कर विज्ञान ने अपनी उद्यमशीलता का परिचय देते हुए सैकड़ों किसानों को एक नई राह दिखाई है। विज्ञान ने अपनी कड़ी मेहनत से उन तमाम लोगों के सामने एक मिसाल भी पेश किया है, जो शहरी नौकरी की तुलना में गांव की खेती को कम समझते हैं तथा उन्हें कमज़ोर मानते हैं।

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