73 वर्ष की विधवा लीला महिदा को 52 साल बाद मिला न्याय: जानिए पूरा मामला

हमारे देश की न्याय व्यवस्था को काफी मज़बूत माना जाता है लेकिन सही मायने में न्याय व्यवस्था की बात की जाये तब वह बहुत ही सुस्त मालूम पड़ती है। हमारे देश में न्याय मिलने में काफी वक्त लग जाता है और लंबे संघर्ष के बाद न्याय मिलता है। इसके अलावा न्याय व्यवस्था इतनी ढीली है कि कभी कभी पूरी जिन्दगी न्याय पाने में गुज़र जाती है।

न्याय की लड़ाई जीतने में 52 वर्ष का लम्बा समय गुज़र गया

यह खबर गुजरात (Gujarat) की है, जहां एक वृद्ध महिला के साथ भी न्याय प्रणाली ने कुछ ऐसा ही किया है। उस वृद्ध महिला को न्याय पाने में 52 वर्ष का लम्बा समय लग गया, तब जाकर उन्हें न्याय मिला। 73 वर्ष की विधवा वृद्ध महिला ने पांच दशक से अधिक समय के बाद अपने पति के ज़मीन पर मालिकाना हक पाया है।

73 years old women

शादी के 1 वर्ष बाद ही पति का स्वर्गवास हुआ

बुजुर्ग महिला का नाम लीला महिदा सिंह हैं और इनकी वर्तमान आयु 73 वर्ष है। वर्ष 1967 में बहुत ही कम उम्र में लीला महिदा की शादी गुजरात के खेड़ा ज़िले के नाडिया क्षेत्र के निवासी संपत सिंह महिदा से हुई थी। विवाह के एक वर्ष बाद ही उनके पति संपत सिंह महिदा का देहांत हो गया। कम उम्र में ही विधवा हो जाने के वजह से लीला अपने मायके आकर रहने लगीं। लीला और उनके माता-पिता को भी उनका जीवन पहाड़ जैसा लगने लगा। लीला कुछ भी समझ नहीं पा रही थी कि उनका बाकी जीवन किसके सहारे गुजरेगा। विशेषत: वृद्ध माता-पिता के बाद उनका क्या होगा और वह किसके आसरे रहेंगी।

एक वर्ष का समय इन्हीं सब चिंतन में गुजर गया, तभी वर्ष 1968 में उन्हें जानकारी मिली कि उनके ससुराल में पति की पुश्तैनी ज़मीन है, जिसपर पति के देहांत के बाद लीला का अधिकार भी है।

73 years old women

जेठ के आनाकानी पर स्वयं शुरु किया ज़मीन के बारे में जानकारी जुटाना

लीला महिदा ने अपने पति के भाई महिपत सिंह महिदा से उस भूमि के बारे में पूछा तब उसने बहानेबाजी करना आरंभ कर दिया। ऐसे में लीला को इस बात की अनुभूति होने लगी कि उनके जेठ के मन में चोर है और वह ज़मीन नहीं देना चाहते हैं। उसके बाद लीला ने अपने पति के भूमि के बारे में सारी जानकारी इकट्ठा करना आरंभ कर दिया। इसके लिये वह सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने लगीं। इसी बीच महिपत सिंह के परिवार में कई लोगों की मृत्यु हो गई और कोई वारिस नहीं बचा।

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जेठ ने धोखे से अपने नाम की थी ज़मीन

लीला को लगातार सरकारी ऑफिस और अपने ससुराल छानने के बाद आखिरकार चार दशक बाद ऑफिस से एक फाइल मिली, जिसके अनुसार उनके पति के पुश्तैनी ज़मीन का इकलौता मालिक उनके जेठ महिपत सिंह हैं। ऐसे में लीला को इस बात का विश्वास नहीं हो रहा था इसलिए उन्होंने अपनी खोजबीन जारी रखी। उसके बाद अंत में लीला को यह जानकारी मिली कि उनके जेठ ने परिवार के वारिस का नकली प्रमाणपत्र देकर सारी भूमि अपने नाम कर ली थी, जिसमें लीला और उनके पति का नाम शामिल नहीं था।

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52 वर्ष के लंबे संघर्ष के बाद मिला 43 बीघा ज़मीन पर अधिकार

जेठ के धोखे के बारे में सूचना मिलने के बाद लीला महिदा ने पति के ज़मीन पर अपना अधिकार व्यक्त करने की न्यायिक लड़ाई आरंभ की। उन्होंने अपने पति के पुश्तैनी ज़मीन के जुटाये गये सभी दस्तावेजों को खेड़ा कलेक्ट्रेट के स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम के सामने पेश किया, उसके बाद स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने आगे की कार्यवाही शुरु किया। खेड़ा कलेक्ट्रेट के स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम को पिछ्ले वर्ष 18 दिसंबर को महिपत सिंह के धोखाधड़ी के बारे में जानकारी मिली। उसके बाद पुलिस ने महिपत सिंह के खिलाफ जालसाजी का केस दर्ज़ किया। पुलिस की सहायता से ही लीला महिदा सिंह, जिनके पास 40 वर्षों तक पति के पुश्तैनी ज़मीन की कोई कागजात नहीं थी, अपने 43 बीघा ज़मीन पर अधिकार मिला।

52 वर्ष के लंबे समय के बाद लीला महिदा को न्याय की प्राप्ति हुई, इससे हम इस बात का अंदाज़ा लगा सकते हैं कि हमारे देश में न्याय व्यवस्था की स्थिति कैसी है? इसलिए हम यह कह सकते हैं कि अब न्याय व्यवस्था में सुधार की ज़रुरत है।

News Desk

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